पश्चिम एशिया में दशकों से जारी इज़राइल–फलस्तीन संघर्ष को सुलझाने के लिए वैश्विक स्तर पर नए प्रयासों की मांग तेज हो गई है। इसी कड़ी में फलस्तीन ने भारत की कूटनीतिक भूमिका पर भरोसा जताते हुए उसे एक प्रभावी मध्यस्थ के रूप में देखा है।
भारत दौरे पर आई फलस्तीन की विदेश एवं प्रवासी मामलों की मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने कहा है कि भारत इस जटिल संघर्ष में “मध्यस्थ और वार्ताकार” की अहम भूमिका निभा सकता है। पीटीआई-वीडियो से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत के इज़राइल और फलस्तीन—दोनों के साथ संतुलित और ऐतिहासिक संबंध उसे इस भूमिका के लिए उपयुक्त बनाते हैं।
शाहीन भारत और संयुक्त अरब अमीरात की सह-अध्यक्षता में 31 जनवरी को होने वाली भारत–अरब देशों के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आई हैं। इस बैठक में अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों के शामिल होने की संभावना है।
फलस्तीन की विदेश मंत्री ने कहा, “भारत एक महान देश है और शांति स्थापना की दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकता है। फलस्तीन और इज़राइल—दोनों का मित्र होना भारत को दोनों के बीच सेतु बनने की स्थिति में रखता है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम उद्देश्य ऐसी शांति स्थापित करना है, जो सम्मान, अंतरराष्ट्रीय कानून और उसमें निहित सिद्धांतों पर आधारित हो। इसके साथ ही फलस्तीन ने भारत से गाजा में पुनर्निर्माण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने और फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के समर्थन की भी अपील की।
शाहीन ने कहा कि अक्टूबर 2023 से इज़राइल के सैन्य अभियानों के कारण गाजा में भारी तबाही हुई है और वहां तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है।
कूटनीतिक गलियारों में चर्चा: क्या बदलेगी भारत की भूमिका?
भारत अब तक इज़राइल–फलस्तीन मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां आतंकवाद के खिलाफ इज़राइल के अधिकार का समर्थन किया है, वहीं फलस्तीन को मानवीय सहायता और एक स्वतंत्र, संप्रभु राज्य की मांग का समर्थन भी जारी रखा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत शांति के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत औपचारिक रूप से मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए आगे आता है, तो यह न केवल पश्चिम एशिया में उसकी कूटनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाएगा, बल्कि ‘ग्लोबल साउथ’ के नेतृत्वकर्ता के रूप में उसकी वैश्विक छवि को भी और मजबूत करेगा।
