उज्जैन को महाकाल की नगरी के नाम से जाना जाता है। यहां स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। लेकिन उज्जैन में महाकाल मंदिर के अलावा भी कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनकी धार्मिक मान्यताएं लोगों को आकर्षित करती हैं। इन्हीं में से एक है हरसिद्धि मंदिर के पीछे स्थित वरसिद्धि माता का मंदिर। इस मंदिर की सबसे खास मान्यता विवाह से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि यहां अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए विशेष तरीके से मन्नत मांगते हैं।
हरसिद्धि मंदिर का पौराणिक महत्व
उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हरसिद्धि माता मंदिर को शक्तिपीठ के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर माता सती की कोहनी गिरी थी। इस मंदिर का उल्लेख शिव पुराण में भी मिलता है। देशभर से श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए यहां पहुंचते हैं।
मंदिर परिसर के पीछे स्थित वरसिद्धि माता का छोटा सा मंदिर भी भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां माता की प्रतिमा स्थापित है। मान्यता है कि वरसिद्धि माता अपने भक्तों को मनचाहा वर प्रदान करती हैं। इसी वजह से विवाह में देरी का सामना कर रहे युवक-युवतियां यहां विशेष रूप से दर्शन करने पहुंचते हैं।
सांकल बजाकर मांगी जाती है विवाह की मन्नत
वरसिद्धि माता मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा मंदिर के दरवाजे की सांकल से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अविवाहित युवक और युवतियां मंदिर पहुंचकर दरवाजे की सांकल बजाते हैं और विवाह की मनोकामना करते हुए वहां एक विशेष धागा बांधते हैं।
इस धागे को पचरंगी धागा कहा जाता है। इसमें तीन या पांच गांठें लगाकर माता से मनचाहा जीवनसाथी मिलने और शीघ्र विवाह होने की प्रार्थना की जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत माता अवश्य पूरी करती हैं।
मंदिर के द्वार पर उल्टा स्वास्तिक बनाने की परंपरा
वरसिद्धि माता मंदिर में सांकल बजाने और धागा बांधने के अलावा स्वास्तिक बनाने की भी विशेष परंपरा है। यहां विवाह की मनोकामना लेकर आने वाले भक्त मंदिर के मुख्य द्वार की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। इसे अपनी अधूरी मनोकामना माता के चरणों में रखने का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता के अनुसार, जिन श्रद्धालुओं की विवाह संबंधी इच्छा पूरी हो जाती है, वे दोबारा मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं और दीवार पर सीधा स्वास्तिक बनाते हैं। इसके साथ ही माता को पूजा सामग्री और प्रसाद भी अर्पित करते हैं।
विवाह में देरी होने पर पहुंचते हैं श्रद्धालु
वरसिद्धि माता मंदिर से जुड़ी इन परंपराओं के कारण यहां दूर-दूर से युवक-युवतियां और उनके परिजन पहुंचते हैं। विशेष रूप से जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही होती है, वे माता के दरबार में धागा बांधकर और सांकल बजाकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते हैं।
हालांकि ये सभी परंपराएं धार्मिक आस्था और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए वरसिद्धि माता का यह मंदिर गहरी श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। उज्जैन आने वाले भक्तों के लिए हरसिद्धि माता मंदिर के दर्शन के साथ इस अनोखे मंदिर में जाना भी एक विशेष धार्मिक अनुभव माना जाता है।
