Bangladesh President Shahabuddin Resigns : बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा संसद के स्पीकर हाफिज़ उद्दीन अहमद ने स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति पद खाली होने के बाद अब संविधान के प्रावधानों के अनुसार स्पीकर नए राष्ट्रपति के चुनाव तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारियां निभाएंगे। बताया गया है कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते शहाबुद्दीन ने यह फैसला लिया।
बीमारी के चलते निभाने में असमर्थ थे संवैधानिक जिम्मेदारियां
स्पीकर हाफिज़ उद्दीन अहमद के अनुसार, राष्ट्रपति शहाबुद्दीन कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। शारीरिक और मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्होंने माना कि वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने अपने हस्ताक्षरित इस्तीफा पत्र के माध्यम से पद छोड़ने का निर्णय लिया।
संविधान के तहत 90 दिनों के भीतर होगा नए राष्ट्रपति का चुनाव
बांग्लादेश के संविधान के अनुसार राष्ट्रपति के इस्तीफे की स्थिति में 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव कराना अनिवार्य है। तब तक स्पीकर कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में दायित्व निभाएंगे। राष्ट्रपति का चुनाव संसद के निर्वाचित सदस्य मतदान के जरिए करते हैं।
संसद में बहुमत के चलते BNP का उम्मीदवार हो सकता है अगला राष्ट्रपति
देश की मौजूदा संसद में बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के पास बहुमत होने के कारण माना जा रहा है कि पार्टी का उम्मीदवार ही अगले राष्ट्रपति के रूप में चुना जा सकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच पिछले कई दिनों से संभावित उम्मीदवार को लेकर मंथन चल रहा था।
कार्यकाल पूरा होने से पहले छोड़ा पद
मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 अप्रैल 2023 को बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी और उनका कार्यकाल वर्ष 2028 तक चलना था। हालांकि, उन्होंने कार्यकाल समाप्त होने से लगभग ढाई वर्ष पहले ही इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
पिछले साल से तेज थी इस्तीफे की अटकलें
जुलाई 2024 में देश में हुए बड़े राजनीतिक बदलाव और शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद से ही राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के भविष्य को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं। नई राजनीतिक परिस्थितियों में उनके पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठ रहे थे। आखिरकार उनके इस्तीफे के साथ बांग्लादेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
