अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए Iran पर होने वाले संभावित हमलों को दो हफ्तों के लिए टालने का ऐलान कर दिया है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब पूरी दुनिया युद्ध की आशंका से चिंतित थी और हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए थे।
युद्ध के बीच अचानक विराम
28 फरवरी से जारी इस संघर्ष में Iran, Israel, Lebanon और Iraq सहित कई देशों में भारी जनहानि हुई है। हजारों लोगों की मौत के बीच अचानक घोषित यह दो हफ्तों का विराम वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
ट्रंप का यू-टर्न या रणनीति?
कुछ समय पहले तक Donald Trump ने चेतावनी दी थी कि अगर Iran ने होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा। यहां तक कि उन्होंने “सभ्यता खत्म होने” जैसी बड़ी चेतावनी भी दी थी।
अब उसी के बीच उन्होंने इस फैसले को “पूरी जीत” बताया है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि यह दबाव में लिया गया कदम है या कोई सोची-समझी रणनीति।
पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका
Pakistan इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम मध्यस्थ के रूप में उभरा है। जानकारी के अनुसार, इस्लामाबाद में 10 अप्रैल से अमेरिका और Iran के बीच बातचीत शुरू हो सकती है।
Turkey, Saudi Arabia और Egypt जैसे देशों के साथ मिलकर बनाए गए दबाव को भी इस विराम की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना केंद्र
होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। सैकड़ों टैंकर समुद्र में फंसे हुए हैं और तेल आपूर्ति बाधित है।
युद्ध विराम की खबर आते ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र के महत्व को दर्शाता है।
इजराइल की शर्त और अधूरा समझौता
Israel ने इस फैसले का समर्थन तो किया है, लेकिन साफ किया है कि यह विराम Lebanon पर लागू नहीं होगा। इससे यह संकेत मिलता है कि संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और तनाव बना रह सकता है।
आगे क्या?
दो हफ्तों का यह विराम अब एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। अगर बातचीत सफल रही तो क्षेत्र में शांति की नई शुरुआत हो सकती है, लेकिन असफलता की स्थिति में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
फिलहाल, दुनिया की नजरें अमेरिका और Iran के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं।
