Chaitra Navratri : नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व में आज दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की विधिवत पूजा की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से साधक को धैर्य, साहस, तप और आत्मसंयम की शक्ति प्राप्त होती है। इस दिन उनकी पूजा करने से आलस्य, क्रोध, स्वार्थ और ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाएं दूर होती हैं और भक्त को लंबी आयु, सुख-समृद्धि तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महत्व
मां ब्रह्मचारिणी का नाम ‘ब्रह्म’ (तपस्या) और ‘चारिणी’ (उसका आचरण करने वाली) से मिलकर बना है, अर्थात् तपस्या का पालन करने वाली देवी। उनका स्वरूप अत्यंत शांत और तेजस्वी है। मां तप में लीन रहती हैं, उनके मुख पर तपस्या का तेज झलकता है। दाहिने हाथ में अक्षमाला और बाएं हाथ में कमंडल धारण किए हुए हैं। मां की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ-साथ जीवन में स्थिरता और आध्यात्मिक बल मिलता है।
मां ब्रह्मचारिणी की व्रत कथा
शास्त्रों के अनुसार, पूर्व जन्म में मां ब्रह्मचारिणी ने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया। नारद जी के उपदेश से उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की। इस कठिन तप के कारण उन्हें तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी नाम मिला। उन्होंने एक हजार वर्ष तक फल-फूल खाकर, सौ वर्ष तक शाक पर जीवन बिताया। कई दिनों तक कठिन उपवास रखा और खुले आकाश में वर्षा-धूप सहते हुए तप किया। तीन हजार वर्ष तक टूटे बिल्वपत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना की। बाद में सूखे बिल्वपत्र भी छोड़ दिए। हजारों वर्ष निर्जल-निराहार रहकर तपस्या की। पत्ते छोड़ देने से उनका नाम अपर्णा भी पड़ा। कठिन तप से उनका शरीर क्षीण हो गया, लेकिन इच्छाशक्ति अटल रही। देवता, ऋषि और सिद्धगण उनकी तपस्या की सराहना करते हुए बोले, “हे देवी, आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी। भगवान चंद्रमौली शिव आपको पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तप छोड़कर घर लौट जाओ।” इस कथा का सार है कि कठिनाइयों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सर्व सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
मां ब्रह्मचारिणी का भोग
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां दुर्गा को शक्कर का भोग लगाना चाहिए।
मां ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र और ध्यान
मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र: वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्। धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥
परम वन्दना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की विधिवत पूजा, व्रत कथा का पाठ और मंत्र जाप से साधक को विशेष फल प्राप्त होता है। भक्तों में मां के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का भाव देखा जा रहा है।
