बिलासपुर/रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने रेल सुरक्षा और आधुनिक संचालन व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल की है। रविवार को बिलासपुर मंडल के अंतर्गत बिलासपुर–जयरामनगर रेलखंड में अत्याधुनिक ‘कवच’ ट्रेन सुरक्षा प्रणाली से लैस लोकोमोटिव का ट्रायल सफलतापूर्वक शुरू किया गया। इस ट्रायल को रेलवे के लिए तकनीकी और संरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ब्लॉक सेक्शन में तकनीकी परीक्षण
इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य ब्लॉक सेक्शन में स्थापित प्रोग्राम्ड टैग्स की सटीक रीडिंग को जांचना है। इसके साथ ही विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में ‘कवच’ से युक्त लोकोमोटिव की ऑटोमैटिक ब्रेकिंग प्रणाली का भी परीक्षण किया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तविक परिस्थितियों में यह सिस्टम पूरी मजबूती के साथ कार्य कर सके।
कर्मचारियों को मिल रहा व्यावहारिक प्रशिक्षण
ट्रायल के दौरान रेलवे अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और ट्रेन रनिंग स्टाफ की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को ‘कवच’ प्रणाली की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है, जिससे भविष्य में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अन्य रेलखंडों में इसके तेज़ और प्रभावी कार्यान्वयन में मदद मिल सके।
क्या है ‘कवच’ और कैसे करता है काम
‘कवच’ भारत की राष्ट्रीय ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जिसे रेलवे दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विकसित किया गया है। यह प्रणाली—
- सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD)
- आमने-सामने या पीछे से होने वाली टक्करों
- अत्यधिक गति
- और मानवीय भूलों
से होने वाली दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम करती है।
‘कवच’ सिस्टम इन-कैब सिग्नल डिस्प्ले, मूवमेंट अथॉरिटी की निरंतर निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग के ज़रिये ट्रेन संचालन को सुरक्षित बनाता है। इससे लोको पायलटों और परिचालन कर्मचारियों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
भविष्य की तैयारी में जुटा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का लक्ष्य केवल अपने नेटवर्क पर ‘कवच’ को शीघ्र लागू करना ही नहीं है, बल्कि इसके लिए एक मजबूत प्रशिक्षण और दक्षता आधारित पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना भी है। इसके तहत रेलवे कर्मियों को इस उन्नत सुरक्षा प्रणाली के संचालन और अनुरक्षण में पूरी तरह दक्ष बनाया जाएगा।
रेल सुरक्षा को नई ऊंचाई देने वाला यह कदम दुर्घटना-रहित, सुरक्षित और भरोसेमंद रेल संचालन की दिशा में भारतीय रेल के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है, जिससे यात्रियों और रेल कर्मचारियों दोनों को लाभ मिलेगा।
