रायपुर, 28 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए राज्य सरकार 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक दो महीने का विशेष जांच अभियान चलाएगी। इस दौरान औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों, किराए के मकानों, होटलों, लॉज और धर्मशालाओं सहित विभिन्न स्थानों पर जांच की जाएगी। अवैध प्रवासियों को शरण देने, रोजगार उपलब्ध कराने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में शामिल लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में सभी जिलों के नोडल अधिकारियों की बैठक लेकर अभियान की तैयारियों और कार्ययोजना की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जिलों में समन्वित तरीके से जांच अभियान चलाया जाए और प्रत्येक संदिग्ध मामले की गहराई से जांच कर उससे जुड़े नेटवर्क का पता लगाया जाए।
नागरिकता और दस्तावेजों का होगा सत्यापन
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि लंबे समय से भारत में रहने मात्र से किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक नहीं माना जा सकता। आधार कार्ड, पैन कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज भी अपने आप में भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं। इसलिए संदिग्ध व्यक्तियों की नागरिकता और निवास की वैधता का निर्धारण केंद्रीय गृह मंत्रालय की निर्धारित प्रक्रिया और प्रचलित कानूनों के अनुसार किया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को बांग्लादेश से आए लोगों के संबंध में विस्तृत जानकारी एकत्र करने और नियमानुसार रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश भी दिए।
औद्योगिक क्षेत्रों और निर्माण स्थलों पर विशेष नजर
अभियान के दौरान रायपुर, कोरबा और रायगढ़ सहित प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी। सड़क एवं भवन निर्माण स्थलों, कुटीर उद्योगों, गुड़ उद्योगों और अन्य प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रमिकों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री ने ठेकेदारों और व्यवसायियों से अपील की कि वे श्रमिकों को काम पर रखने से पहले नियमानुसार उनका सत्यापन सुनिश्चित करें। अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को रोजगार या आश्रय उपलब्ध कराने के मामलों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
किराएदारों का सत्यापन होगा अनिवार्य
राज्य में किराएदारों के सत्यापन पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। मकान मालिकों को किराए पर मकान देने से पहले संबंधित व्यक्तियों के आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर उनका सत्यापन कराना होगा। इसके लिए किराएदारों की जानकारी साझा करने वाले ऐप को सक्रिय कर प्रभावी ढंग से उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
होटल, लॉज, धर्मशालाओं और अन्य आवासीय प्रतिष्ठानों में ठहरने वाले संदिग्ध व्यक्तियों के दस्तावेजों की भी जांच होगी। जानबूझकर अवैध प्रवासियों को आश्रय देने या उन्हें दूसरे स्थानों तक पहुंचाने में सहयोग करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्राम सभाओं और पार्षदों की ली जाएगी मदद
अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का सहयोग भी लिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के माध्यम से जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि शहरी क्षेत्रों में पार्षदों के सहयोग से संदिग्ध मामलों की पहचान और सत्यापन किया जाएगा।
गांव-गांव जाकर सामान बेचने वाले फेरीवालों और विभिन्न कार्यों के लिए बाहर से आने वाले लोगों के पंजीयन की व्यवस्था करने की भी योजना है। इसके लिए प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी निर्धारित करने और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के माध्यम से पंजीयन प्रक्रिया संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध प्रवासियों की निगरानी के लिए बनेगा विशेष सॉफ्टवेयर
राज्य सरकार अवैध प्रवासियों की पहचान और निगरानी के लिए विशेष सॉफ्टवेयर विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसमें संदिग्ध व्यक्तियों की जानकारी, दस्तावेजों के सत्यापन और अलग-अलग जिलों में की गई जांच का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
इस व्यवस्था से एक जिले में किसी व्यक्ति के संबंध में की गई जांच की जानकारी दूसरे जिलों को भी उपलब्ध हो सकेगी। इससे पुलिस और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों को सोशल मीडिया और डिजिटल ऐप के माध्यम से संचालित संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट बनाने वालों पर कार्रवाई
उप मुख्यमंत्री ने फर्जी आधार कार्ड, पासपोर्ट और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों और सेवा केंद्रों की भूमिका की जांच की जाएगी।
फर्जी पाए गए आधार कार्डों को संबंधित प्राधिकरण के माध्यम से नियमानुसार निष्क्रिय कराने की कार्रवाई की जाएगी। संदिग्ध पासपोर्ट जारी होने के मामलों में भी दस्तावेज तैयार करने से लेकर जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच कर दोषियों की पहचान की जाएगी। दूसरे राज्यों में भी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
पहचान के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा निर्वासन
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध व्यक्तियों के दस्तावेजों की जांच कर उनकी नागरिकता और भारत में रहने की वैधता सुनिश्चित की जाए। अवैध प्रवासी पाए जाने पर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता के मुताबिक उन्हें होल्डिंग सेंटर में रखने और इसके बाद निर्वासन की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विजय शर्मा ने कहा कि जांच केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अवैध प्रवासियों को आश्रय देने, रोजगार उपलब्ध कराने, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क की जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने मुंगेली और बेमेतरा जिलों में चोरी के मामलों सहित नौ अन्य आपराधिक प्रकरणों में अवैध प्रवासियों की संदिग्ध संलिप्तता के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए सतर्कता बढ़ाने को कहा। साथ ही प्रत्येक मामले में तथ्यात्मक जांच और कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने के लिए टोल फ्री नंबर जारी
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रदेशवासियों से अभियान में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के अवैध रूप से देश में रहने के संबंध में जानकारी या संदेह होने पर टोल फ्री नंबर 1800-233-1905 पर सूचना दी जा सकती है। प्राप्त सूचनाओं की संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच की जाएगी।
बैठक में गृह सचिव नेहा चंपावत ने कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान और जांच केंद्रीय गृह मंत्रालय की निर्धारित मानक प्रक्रिया के अनुसार की जानी चाहिए। पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने भी अधिकारियों को प्रत्येक मामले की विस्तृत जांच करने और संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता) अमित कुमार, पुलिस उप महानिरीक्षक ओ.पी. पाल सहित विभिन्न जिलों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
