नई दिल्ली। आगामी राज्यसभा चुनाव 2026 को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में चुनावी तैयारियों को मजबूत करने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने बिहार सहित तीन राज्यों के लिए अलग-अलग नेताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी है।
इन नेताओं को मिली पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी
पार्टी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार बिहार के लिए छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को पर्यवेक्षक बनाया गया है। वहीं हरियाणा के लिए गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा ओडिशा के लिए महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। इन नेताओं का काम संबंधित राज्यों में पार्टी की चुनावी रणनीति पर नजर रखना और समन्वय बनाए रखना होगा।
कई राज्यों में उम्मीदवारों का ऐलान
इससे पहले 4 मार्च 2026 को भाजपा ने छह राज्यों में होने वाले राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए 9 उम्मीदवारों की घोषणा की थी।बिहार में जहां पांच सीटें खाली हो रही हैं, वहां भाजपा ने पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन और राज्य नेता शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है।
असम में तीन सीटों के लिए चुनाव होना है, जहां पार्टी ने विधायक तेराश गोवाला और कैबिनेट मंत्री जोगेन मोहन को मैदान में उतारा है।वहीं छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों के लिए राज्य महिला आयोग की सदस्य लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है।
हरियाणा और ओडिशा में भी उम्मीदवार घोषित
हरियाणा में दो सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए भाजपा ने पूर्व सांसद संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है।
इसके अलावा ओडिशा में चार सीटों पर चुनाव होने हैं, जहां पार्टी ने राज्य इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा सांसद सुजीत कुमार को उम्मीदवार घोषित किया है।
वहीं पश्चिम बंगाल में पांच सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए पार्टी ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा को मैदान में उतारा है।
क्या कहता है राज्यसभा का गणित
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। बिहार विधानसभा में एनडीए के पास 202 विधायक हैं। ऐसे में चार सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद उसके पास 38 वोट अतिरिक्त बचेंगे।
पांचवीं सीट जीतने के लिए एनडीए को करीब 3 और वोटों की जरूरत होगी। वहीं महागठबंधन के पास लगभग 35 विधायकों का समर्थन है, जिससे उसे जीत के लिए 6 अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे।
अन्य दलों के रुख पर टिकी नजर
16 मार्च को होने वाले चुनाव में एआईएमआईएम के 5 विधायक और बीएसपी का एक विधायक अहम भूमिका निभा सकते हैं। इनके रुख पर ही अंतिम परिणाम काफी हद तक निर्भर करेगा।
