नई दिल्ली, भारत ने बांग्लादेश में आगामी संसदीय चुनावों से पहले सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए एहतियाती कदम उठाया है। सरकार ने वहां तैनात भारतीय अधिकारियों के परिवारों को अस्थायी रूप से भारत लौटने की सलाह दी है। अधिकारियों के अनुसार यह फैसला पूरी तरह एहतियात के तौर पर लिया गया है और इससे बांग्लादेश में भारतीय राजनयिक मिशनों के कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा स्थिति के आकलन के बाद दूतावास और अन्य भारतीय मिशनों में कार्यरत अधिकारियों के आश्रितों को भारत लौटने की सलाह दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग सहित बांग्लादेश में भारत के सभी मिशन खुले हैं और सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं। सभी राजनयिक सेवाएं और गतिविधियां पहले की तरह जारी हैं।
बताया गया है कि बांग्लादेश में तैनात अधिकारियों को सूचित किया गया था कि उनके परिवारों को 8 जनवरी तक भारत लौटना होगा। जिन अधिकारियों के बच्चे स्कूल में अध्ययनरत थे, उन्हें अतिरिक्त सात दिनों का समय भी दिया गया। इसके चलते 15 जनवरी तक ढाका, चटगांव, खुलना, सिलहट और राजशाही स्थित भारतीय मिशनों में तैनात अधिकारियों के अधिकांश परिवार भारत लौट चुके हैं।
गौरतलब है कि बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। यह चुनाव 2024 में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद पहला आम चुनाव होगा। अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद तत्कालीन सरकार का पतन हुआ था, जिसके बाद से देश में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। वर्तमान में कार्यवाहक प्रशासन का नेतृत्व नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं, जो आम चुनावों के बाद पद छोड़ने वाले हैं।
हालांकि, इस पूरे मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से अब तक कोई औपचारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम क्षेत्रीय हालात और चुनावी अवधि के दौरान संभावित सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक सतर्कतापूर्ण निर्णय है।
