गोयल एग्रो केवटी के संचालक को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
जिले में अवैध चावल परिवहन और राइस मिल संचालन में अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर कार्यालय (खाद्य शाखा) द्वारा केल्हारी तहसील के केवटी स्थित गोयल एग्रो केवटी राइस मिल के संचालक श्री संजीव कुमार गोयल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
यह कार्रवाई केल्हारी अनुविभागीय अधिकारी श्रीमती इंदिरा मिश्रा, भरतपुर अनुविभागीय अधिकारी श्री शशि शेखर मिश्रा, खाद्य निरीक्षक भरतपुर श्री प्रवीण मिश्रा तथा केल्हारी खाद्य निरीक्षक श्रीमती ममता भगत की संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 16 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम घुघरी में 32 टन चावल से लदा वाहन जप्त किया गया था। इसके बाद 22 दिसंबर 2025 को गोयल एग्रो केवटी राइस मिल का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि मिल द्वारा नियमों को दरकिनार करते हुए अनाधिकृत अंतर्राज्यीय चावल परिवहन किया गया, साथ ही बिना अनुमति चावल का क्रय भी किया गया।
संयुक्त जांच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख है कि शासकीय धान को एक मिल से दूसरी मिल में अवैध रूप से स्थानांतरित किया गया। चावल एवं धान के स्टॉक का संधारण निर्धारित प्रारूप में नहीं किया गया तथा मासिक विवरणियां नियमित रूप से कलेक्टर को प्रस्तुत नहीं की जा रही थीं। भौतिक सत्यापन के दौरान 774.04 क्विंटल चावल की भारी कमी पाई गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि गोयल एग्रो केवटी राइस मिल डमी मिल के रूप में संचालित हो रही है, जो केवल दस्तावेजों में कस्टम मिलिंग दर्शा रही है। इसकी पुष्टि मिल की अत्यंत कम विद्युत खपत से होने की बात कही गई है।
निरीक्षण के दौरान मिल परिसर में गंभीर गंदगी पाई गई। चावल और धान के भंडारण स्थल पर मरे हुए चूहे, कबूतरों की बीट और सड़ा हुआ चावल मिला, जिसे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक बताया गया है। इन हालातों को देखते हुए फूड पॉयजनिंग की आशंका भी जताई गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कृत्य छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016, धान खरीदी से संबंधित आदेशों तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 एवं 7 का गंभीर उल्लंघन है। जारी नोटिस के माध्यम से मिल संचालक को सात दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में एकपक्षीय कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई से जिले में खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की पारदर्शिता और उपभोक्ता स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सख्ती स्पष्ट रूप से सामने आई है।
