रायपुर, 27 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण के साथ-साथ अधोसंरचना विकास को नई गति देने की तैयारी की जा रही है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल यानी हाउसिंग बोर्ड अब केवल मकानों के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क, पुल, स्टेडियम, सार्वजनिक भवन, टाउन प्लानिंग और शहरी पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में हाउसिंग बोर्ड प्रदेश के आर्थिक और अधोसंरचनात्मक विकास का प्रमुख इंजन बन सकता है।
नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ओपी चौधरी ने अधिकारियों और कर्मचारियों से आधुनिक तकनीक, नवाचार, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ मंडल को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना होगा, ताकि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण आवास और आधुनिक अधोसंरचना का विकास किया जा सके।
700 करोड़ रुपये की ऋण देनदारी से मिली राहत
मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड कुछ वर्ष पहले गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा था। बड़ी ऋण देनदारी, सीमित परियोजनाओं और लंबे समय से खाली पड़ी संपत्तियों के कारण संस्था की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई थी। राज्य सरकार ने वित्त विभाग के सहयोग से लगभग 700 करोड़ रुपये की लंबित ऋण देनदारी समाप्त करने का निर्णय लिया। इससे मंडल को वित्तीय दबाव से राहत मिली और नई परियोजनाओं पर काम करने के अवसर बढ़े।
उन्होंने बताया कि लंबे समय से खाली पड़ी संपत्तियों के विक्रय के लिए वन टाइम सेटलमेंट यानी ओटीएस योजना लागू की गई। आकर्षक छूट, प्रभावी विपणन और नियमित निगरानी के माध्यम से संपत्तियों की बिक्री को गति मिली। इससे संस्था के संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में मदद मिली।
हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने भी पिछले लगभग 18 महीनों की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस अवधि में करीब 8 हजार संपत्तियों का विक्रय किया गया और लगभग 1,800 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। इसके अलावा 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। आगामी दिसंबर में भी नई परियोजनाएं शुरू करने की तैयारी है।
मांग के आधार पर शुरू होंगी नई आवासीय परियोजनाएं
हाउसिंग बोर्ड की नई आवासीय परियोजनाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। मंत्री ने कहा कि पहले कई बार पर्याप्त मांग का आकलन किए बिना आवासीय योजनाएं शुरू कर दी जाती थीं। इससे बड़ी संख्या में मकान खाली रह जाते थे और संस्था की पूंजी लंबे समय तक फंसी रहती थी।
इस समस्या को दूर करने के लिए अब परियोजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में मांग को प्राथमिकता दी जा रही है। नई व्यवस्था के तहत निविदा प्रक्रिया में शुरुआती तीन महीने के भीतर 30 प्रतिशत बुकिंग अथवा कुल 60 प्रतिशत बुकिंग की शर्त को शामिल किया गया है।
इसका उद्देश्य वास्तविक मांग के अनुरूप आवासीय परियोजनाएं शुरू करना और वित्तीय जोखिम को कम करना है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे परियोजनाओं के स्थान चयन, निर्माण गुणवत्ता, लागत, नागरिक सुविधाओं और विपणन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दें। आम नागरिकों की जरूरतों और उनकी क्रय क्षमता के अनुरूप आवास उपलब्ध कराना मंडल की प्राथमिकता होनी चाहिए।
सड़क, पुल और स्टेडियम निर्माण में भी उतरेगा हाउसिंग बोर्ड
राज्य सरकार हाउसिंग बोर्ड की तकनीकी क्षमता का उपयोग अब व्यापक अधोसंरचना विकास में करना चाहती है। मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि मंडल के पास अनुभवी अभियंताओं, तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों का बड़ा संसाधन उपलब्ध है। इसका लाभ सड़क, पुल-पुलिया, खेल परिसर, स्टेडियम, सार्वजनिक भवन और अन्य निर्माण परियोजनाओं में भी लिया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को दूसरे राज्यों की निविदाओं में भाग लेने और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही आने वाले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ के बाहर भी परियोजनाएं हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित कर काम करने की बात कही।
इस पहल से मंडल की आय बढ़ने के साथ उसकी तकनीकी दक्षता और कार्यकुशलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है। इससे निर्माण क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
टीपीएस और पीपीपी मॉडल से होगा विकास
मंत्री ने कहा कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। अधोसंरचना विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल, टाउन प्लानिंग स्कीम यानी टीपीएस और शहरी पुनर्विकास जैसे विकल्पों को बढ़ावा देना जरूरी है।
राज्य सरकार ने टाउन प्लानिंग स्कीम से जुड़े कार्यों में हाउसिंग बोर्ड, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम और नगरीय निकायों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
टीपीएस मॉडल के तहत निजी भूमि का योजनाबद्ध विकास कर सड़क, जलापूर्ति और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण किया जा सकता है। विकास लागत और आवश्यक भूमि का समायोजन करने के बाद भू-स्वामियों को विकसित भूखंड उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे भूमि अधिग्रहण से जुड़ी कठिनाइयों को कम करने और व्यवस्थित शहरी विकास को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
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