रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूज्य माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर 200 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी किया। लोकभवन स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे। 35 ग्राम वजन वाला यह सिक्का चार अलग-अलग धातुओं से तैयार किया गया है। इसे ऑनलाइन बुक करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
सिक्के पर माता हासी देवी और अशोक स्तंभ की छवि
स्मारक सिक्के के एक तरफ शदाणी दरबार की पांचवीं पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की तस्वीर अंकित है, जबकि दूसरी तरफ अशोक स्तंभ के साथ 200 रुपये का मूल्यवर्ग दर्शाया गया है। इस सिक्के के जरिए माता हासी देवी के आध्यात्मिक और धार्मिक योगदान को सम्मान दिया गया है।
सिंधी समाज के लिए ऐतिहासिक अवसर
माता हासी देवी की 200वीं जयंती पर स्मारक सिक्का जारी किए जाने को सिंधी समाज के लिए गौरवपूर्ण अवसर माना जा रहा है। धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने से देश-विदेश में रहने वाले सिंधी समुदाय में खुशी का माहौल है। कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, सुनील सोनी और मोतीलाल साहू सहित विधायक पुरंदर मिश्रा तथा अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
चार धातुओं से बना है 35 ग्राम का सिक्का
200 रुपये का यह स्मारक सिक्का चार धातुओं के मिश्रण से बनाया गया है और इसका कुल वजन 35 ग्राम है। सिक्के पर उकेरी गई तस्वीरें और प्रतीक इसे माता हासी देवी की 200वीं जयंती की स्मृति से जोड़ते हैं। इस विशेष सिक्के को ऑनलाइन बुक करने की सुविधा भी दी गई है। हालांकि, बुकिंग की आधिकारिक वेबसाइट, कीमत और उपलब्धता की विस्तृत जानकारी संबंधित आधिकारिक स्रोत से जांचने के बाद ही साझा की जानी चाहिए।
दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचीं राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर गुरुवार को रायपुर पहुंचीं। स्मारक सिक्का जारी करने के बाद वह शाम 4 बजे बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व’ और ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम में शामिल होंगी।
23 अक्टूबर को जगदलपुर में मुरिया दरबार में होंगी शामिल
राष्ट्रपति के दौरे का अगला चरण बस्तर में होगा। 23 अक्टूबर को द्रौपदी मुर्मू जगदलपुर में आयोजित मुरिया दरबार में शामिल होंगी। उनके इस दौरे को छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
