नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 17 अक्टूबर 2026 तक बंद रखने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, यमन के हूथी विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद हवाई अड्डे की सुरक्षा और संचालन व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस घटनाक्रम से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ने की बात कही गई है।
17 अक्टूबर तक एयरपोर्ट बंद रखने की जानकारी
जारी नोटिस टू एयर मिशन्स (NOTAM) के अनुसार, एयरपोर्ट को 17 अक्टूबर को रात 9 बजे GMT तक बंद रखने की समयसीमा बताई गई है। इसके चलते एयरलाइंस को उड़ानों के संचालन में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि, यात्रियों को अपनी उड़ान की ताजा स्थिति संबंधित एयरलाइन से जांचने की सलाह दी जाती है।
सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका पर सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने यह जांच शुरू की है कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली कुछ मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में क्यों नाकाम रही। जांच में हमलों की पूर्व चेतावनी, मिसाइलों की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था की प्रतिक्रिया जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
सऊदी अरब की रक्षा प्रणाली में पैट्रियट जैसे मिसाइल इंटरसेप्टर शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एक साथ कई ड्रोन और मिसाइलों से किए जाने वाले हमलों को रोकना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले पूरे एयर डिफेंस सिस्टम को विफल बताना उचित नहीं होगा।
अमेरिका की भूमिका और तेल आपूर्ति पर चिंता
इस घटनाक्रम के बीच सऊदी अरब द्वारा हूथी विद्रोहियों के खिलाफ अभियान में अमेरिका की अधिक प्रत्यक्ष भागीदारी चाहने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। दूसरी ओर, सैन्य कार्रवाई बढ़ने से संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका जताई जा रही है।
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने का असर बाब-अल-मंडेब और होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर भी पड़ सकता है। इन रास्तों से वैश्विक व्यापार और तेल की बड़ी मात्रा का परिवहन होता है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर तेल आपूर्ति, माल ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल, रियाद एयरपोर्ट बंद रहने की खबर और सऊदी अरब की हवाई सुरक्षा व्यवस्था की जांच ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में एयरपोर्ट के संचालन और संघर्ष की स्थिति पर सभी की नजर रहेगी।
