नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि हिरासत में रखे गए नेताओं को वकील से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है और उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं।
रत्ना सिंह के अनुसार, सौरव दास, आशुतोष रांका और अन्य नेताओं को जाफरपुर कलां पुलिस थाने में रखा गया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि थाने के एसएचओ ने कानूनी प्रतिनिधियों को नेताओं से मिलने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने सवाल उठाया कि नेताओं को किस कानूनी आधार पर हिरासत में रखा गया है और उनके वकीलों को उनसे मिलने से क्यों रोका जा रहा है। हालांकि, ये आरोप CJP की ओर से लगाए गए हैं।
जंतर-मंतर के बंद गेट से अंदर घुसे थे नेता
जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह CJP के को-कन्वीनर सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई लोग जंतर-मंतर पहुंचे थे। बताया गया है कि प्रदर्शन स्थल के गेट बंद होने के बावजूद नेता गेट फांदकर अंदर दाखिल हुए। इस दौरान अजिंक्य शिंदे समेत पार्टी के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका कम से कम 10 अन्य लोगों के साथ वहां पहुंचे थे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर में दाखिल हुए थे।
प्रदर्शन स्थल का दर्जा हटाए जाने पर विवाद
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई घटना से एक दिन पहले हुई थी।
हिरासत में लिए जाने के बाद सौरव दास ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। उन्होंने दावा किया कि CJP ने जंतर-मंतर पर दोबारा अपना स्थान हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन स्थल की सूची से नाम हटाए जाने के 24 घंटे के भीतर पार्टी के सदस्यों ने वहां पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया।
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को केवल सूची से हटाकर समाप्त नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, वकील से मुलाकात की अनुमति नहीं मिलने और मोबाइल फोन जब्त किए जाने से जुड़े आरोप CJP की ओर से लगाए गए हैं। मामले में पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आने पर हिरासत की परिस्थितियों और कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
