रायपुर, 24 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) देश के आर्थिक इतिहास का सबसे बड़ा कर सुधार है। जीएसटी ने जटिल अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने के साथ व्यापारियों तथा उद्यमियों के लिए कारोबार करना आसान किया है। इससे भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के बेहतर अवसर मिले हैं।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी शनिवार को दुर्ग जिले के अंजोरा स्थित पृथ्वी पैलेस में आयोजित छत्तीसगढ़ टैक्स टेक समिट 2026 को संबोधित कर रहे थे। टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री एवं दुर्ग विधायक गजेंद्र यादव, जीएसटी अपीलीय अधिकरण की प्रधान पीठ के अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे कर विशेषज्ञ, अधिवक्ता और टैक्स प्रैक्टिशनर्स शामिल हुए। समिट में जीएसटी कानून, कर अनुपालन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा की गई।
जीएसटी ने आसान बनाई देश की कर व्यवस्था: ओपी चौधरी
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले देश में विभिन्न प्रकार के अप्रत्यक्ष कर और उपकर प्रचलित थे। अलग-अलग कर प्रणालियों के कारण व्यापारियों को कई प्रक्रियागत चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। जीएसटी ने विभिन्न करों को एकीकृत कर देश को साझा अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था प्रदान की।
उन्होंने कहा कि एकीकृत कर प्रणाली से कर अनुपालन की प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और कर चोरी पर नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिली है। जीएसटी सुधारों ने कारोबार को सुगम बनाने और व्यापारियों पर अनुपालन संबंधी बोझ कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
चौधरी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आधुनिक, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी कर व्यवस्था आवश्यक है। जीएसटी इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान कर रहा है। इससे भारतीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भागीदारी बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं।
टैक्स प्रैक्टिस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ेगी भूमिका
छत्तीसगढ़ टैक्स टेक समिट 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग पर विशेष चर्चा हुई। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि तकनीकी बदलाव और नवाचार वर्तमान समय की प्रमुख जरूरत हैं। एआई तेजी से विभिन्न क्षेत्रों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा है और कर प्रशासन में भी इसकी उपयोगिता बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि लेखांकन, विधिक अनुसंधान, दस्तावेजों के विश्लेषण और कर अनुपालन जैसे कार्यों में एआई आधारित तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। इससे कामकाज को अधिक सटीक, प्रभावी और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स बार एसोसिएशन के सदस्य करदाताओं और शासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए उनके लिए आधुनिक डिजिटल उपकरणों और नई तकनीकों की जानकारी रखना जरूरी है। समिट में आयोजित तकनीकी सत्रों के माध्यम से टैक्स प्रैक्टिशनर्स को एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराने का प्रयास किया गया, ताकि वे अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ करदाताओं को बेहतर सेवाएं दे सकें।
विधि शिक्षा के पाठ्यक्रम में जीएसटी कानून शामिल करने का सुझाव
समिट के दौरान टैक्स बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री एवं विधि और विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव के समक्ष विधि शिक्षा के पाठ्यक्रम में जीएसटी कानून को शामिल करने का सुझाव रखा।
प्रतिनिधियों का कहना था कि वर्तमान आर्थिक परिवेश में जीएसटी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विधि के विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही अप्रत्यक्ष कर प्रणाली और जीएसटी कानून की व्यावहारिक जानकारी दी जानी चाहिए। इससे विद्यार्थियों को कानून की सैद्धांतिक समझ के साथ कर संबंधी मामलों का व्यावहारिक ज्ञान भी मिलेगा और भविष्य में उनके लिए रोजगार तथा व्यावसायिक अवसर बढ़ सकते हैं।
ज्ञान और तकनीक के समन्वय से मिलेगी सफलता: संजय कुमार मिश्रा
जीएसटी अपीलीय अधिकरण की प्रधान पीठ के अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा ने समिट को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए कर्म के साथ ज्ञान का होना आवश्यक है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान के साथ किया गया कर्म लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में अधिक प्रभावी होता है।
मिश्रा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। कर और विधिक क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों के लिए भी नई तकनीकों को समझना और उनका उचित उपयोग करना जरूरी है। बदलते समय के अनुरूप खुद को तैयार करके ही पेशेवर दक्षता को बेहतर बनाया जा सकता है।
प्रदेश के कई जिलों से पहुंचे टैक्स विशेषज्ञ
छत्तीसगढ़ टैक्स टेक समिट 2026 का आयोजन टैक्स बार काउंसिल के अध्यक्ष विवेक सारस्वत और गोपाल कृष्ण तवनिया के नेतृत्व में किया गया। एसोसिएशन के महासचिव प्रभांक ठाकुर ने बताया कि संगठन की ओर से सदस्यों को कर कानूनों में होने वाले बदलावों, नए प्रावधानों और तकनीकी नवाचारों की जानकारी देने के लिए समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इन आयोजनों से कर विशेषज्ञों को अपने ज्ञान और व्यावसायिक दक्षता को बढ़ाने का अवसर मिलता है।
समिट में जगदलपुर, अंबिकापुर, धमतरी, राजनांदगांव, रायपुर, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर और दुर्ग समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से टैक्स बार एसोसिएशन के सदस्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान जीएसटी कानून, कर अनुपालन, आधुनिक डिजिटल तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक इस्तेमाल से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
समिट का प्रमुख उद्देश्य कर क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को बदलती तकनीक और कानूनों के अनुरूप तैयार करना तथा कर प्रशासन एवं करदाताओं को मिलने वाली सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर चर्चा करना रहा।
