भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण के संकल्प को और मजबूत करने की भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि “जल जीवन का आधार है, और इसे बचाना हमारी सांस्कृतिक, सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है।” मुख्यमंत्री ने यह संदेश 90 दिवसीय जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता पर अपने लेख के माध्यम से साझा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कैच द रेन” और “मिशन लाइफ” जैसे अभियानों को प्रेरणास्रोत बताते हुए राज्य के जल संरक्षण प्रयासों को रेखांकित किया।
खंडवा बना जल संरचनाओं में अग्रणी, 1.29 लाख संरचनाओं का निर्माण
सीएम मोहन यादव ने बताया कि इस अभियान में पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर जल संरचनाओं का निर्माण हुआ, जिसमें खंडवा जिला 1.29 लाख संरचनाओं के साथ भू-जल संरक्षण में पहले स्थान पर रहा। यह अभियान जल स्रोतों के पुनर्जीवन, जनजागरूकता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक सशक्त प्रयास साबित हुआ है।
इतिहास से प्रेरणा, आधुनिक तकनीक से क्रियान्वयन
सीएम ने लिखा कि जल संरक्षण भारतीय परंपरा में गहराई से जुड़ा है — ऋग्वेद, रामायण और महाभारत में जल के महत्व का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि हमने इस पुरातन परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए जल गंगा संवर्धन अभियान को सफल बनाया है।
- पहली बार वर्षा जल संग्रह के लिए राज्य स्तर पर संगठित प्रयास हुए।
- री-यूज, रीड्यूस और रीसायकल पर आधारित जल प्रबंधन रणनीति अपनाई गई।
- AI, सिपरी और प्लानर सॉफ्टवेयर जैसे तकनीकी टूल्स के उपयोग से 83,000 से अधिक खेत तालाब बनाए गए।
- 2000 से अधिक बावड़ियों का जीर्णोद्धार कर “बावड़ी उत्सव” मनाया गया।
जल संरक्षण को जन आंदोलन में बदला
- 2.30 लाख जल दूत (जल सैनिक) तैयार कर युवाओं को जोड़ा गया।
- 812 पानी चौपालों के माध्यम से किसानों ने जल संरक्षण पर संवाद किया।
- “खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में” के मंत्र के तहत स्थानीय जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर दिया गया।
सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने का संकल्प
सीएम ने लिखा कि जल संरक्षण के साथ-साथ राज्य की जल सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया गया है।
- भोपाल की ऐतिहासिक बड़े बाग बावड़ी और होलकर कालीन बावड़ी का पुनरुद्धार किया गया।
- राज्य की 145 नदियों के उद्गम स्थलों को चिन्हित कर वहां साफ-सफाई और पौधारोपण शुरू हुआ।
नर्मदा से ताप्ती तक जलमंगल की राह
मध्यप्रदेश की धरती मां नर्मदा, शिप्रा, ताप्ती और बेतवा जैसी 267 नदियों की जननी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह धरती प्रकृति की अमूल्य संपदा से समृद्ध है और हमें इसे अगली पीढ़ियों के लिए सहेजना होगा।