Maha Shivratri 2026 Bhadra: आज देशभर में महाशिवरात्रि 2026 का पावन पर्व मनाया जा रहा है। शिव भक्त सुबह से ही मंदिरों और शिवालयों में शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और मंत्र जाप कर भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न कर रहे हैं। चाहे वह काशी की नगरी हो या उज्जैन का महाकाल स्थल, हर जगह हर हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंज रहा है।
महाशिवरात्रि का शुभ योग
ज्योतिष के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि पर 12 घंटे से अधिक समय तक सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है। यह योग सभी जातकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।
भद्रा का समय और अर्थ
महाशिवरात्रि के दिन शाम 5 बजकर 4 मिनट से भद्रा प्रारंभ हो रही है, जो 12 घंटे तक जारी रहेगी। भद्रा का समापन 16 फरवरी सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर होगा। भद्रा को सामान्यत: अशुभ समय माना जाता है और इस समय किसी भी शुभ कार्य में बाधा या विघ्न आने की संभावना होती है।
पंचांग के अनुसार, भद्रा का वास पाताल लोक में है, इसलिए इसका प्रभाव धरती पर मृत्यु लोक या भौतिक कार्यों में सीमित माना जाता है। फिर भी, ज्योतिषियों का सुझाव है कि शुभ कार्यों के लिए भद्रा का समय टालना बेहतर होता है।
भद्रा में महाशिवरात्रि पूजा
भद्रा काल के दौरान भी भगवान शिव की पूजा में कोई बाधा नहीं आती, क्योंकि शिव स्वयं महाकाल हैं और काल से परे हैं। ऐसे में भद्रा में भी रात्रि चार प्रहर की पूजा विधिपूर्वक की जा सकती है।
- रात्रि प्रथम प्रहर: शाम 06:39 बजे – रात 09:45 बजे
- रात्रि द्वितीय प्रहर: रात 09:45 बजे – 12:52 AM
- रात्रि तृतीय प्रहर: 12:52 AM – 03:59 AM
- रात्रि चतुर्थ प्रहर: 03:59 AM – सुबह 07:06 AM
महाशिवरात्रि निशिता पूजा मुहूर्त
निशिता पूजा का शुभ मुहूर्त देर रात 12 बजकर 09 मिनट से मध्यरात्रि 01 बजकर 01 मिनट तक है। निशिता पूजा के दौरान किए गए मंत्रों की सिद्धि विशेष होती है और इसी समय से महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि की तारीखें निर्धारित होती हैं।
