इस्लामाबाद। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा उठाए गए कड़े कदमों के चलते भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और गहराता जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) ने गुरुवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में इस्लामाबाद में एक आपात बैठक बुलाई। इस उच्चस्तरीय बैठक में रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, सैन्य प्रमुखों और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
भारत के कदमों पर तीखी प्रतिक्रिया
बैठक का मकसद भारत द्वारा हाल ही में लिए गए कठोर निर्णयों पर रणनीतिक प्रतिक्रिया तय करना था। इनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना, अटारी चेकपोस्ट को बंद करना, पाकिस्तानी नागरिकों पर वीजा प्रतिबंध लगाना और SAARC वीजा स्कीम को रद्द करना शामिल है।
पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने बैठक के बाद कहा, “भारत ने बिना किसी पुख्ता सबूत के पहलगाम हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया है। यह पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना रवैया है, जिसका निर्णायक जवाब दिया जाएगा।”
हवाई क्षेत्र और कूटनीतिक संबंधों पर असर
जियो टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अब भारत की वाणिज्यिक उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने पर विचार कर रहा है। इसके साथ ही भारत के साथ सभी द्विपक्षीय समझौते, जिनमें शिमला समझौता भी शामिल है, तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं।
भारत की वीजा नीतियों के जवाब में पाकिस्तान ने भी SAARC वीजा स्कीम के तहत भारतीय नागरिकों को जारी सभी वीजा रद्द कर दिए हैं और उन्हें 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया है।
वाघा बॉर्डर और व्यापारिक गतिविधियों पर विराम
भारत द्वारा वाघा बॉर्डर बंद किए जाने की घोषणा के बाद पाकिस्तान ने भी अपनी ओर से सीमा को सील कर दिया है और सभी द्विपक्षीय व्यापारिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।
सिंधु जल संधि बना विवाद का केंद्र
भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने को पाकिस्तान ने गंभीर रूप से लिया है। NSC बैठक में इसे पाकिस्तान की 24 करोड़ जनता की “जीवन रेखा” बताया गया और चेतावनी दी गई कि अगर भारत पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है तो यह ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानी जाएगी।
भारतीय नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश
भारत द्वारा अपने नागरिकों को पाकिस्तान छोड़ने की सलाह के जवाब में, पाकिस्तान ने 30 अप्रैल 2025 तक सभी भारतीय नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय द्विपक्षीय संबंधों में अभूतपूर्व तनाव को दर्शाता है।
क्षेत्रीय शांति पर संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात में कूटनीतिक समाधान नहीं तलाशा गया, तो यह विवाद न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।