लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली इंडी गठबंधन की महारैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर पलटवार किया है। उन्होंने रैली की तारीख पर भाजपा की आपत्तियों और विरोध के बीच तंज कसते हुए कहा कि वह भाजपा और उसके सहयोगियों के आभारी हैं, जो उनकी रैली का प्रचार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने उनसे अगले सात दिनों तक भी इसी उत्साह के साथ प्रचार करते रहने को कहा।
कथित वोट चोरी के खिलाफ आयोजित होने वाली इस रैली का नाम ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रखा गया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट के जरिए लोगों से इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और कारोबारियों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।
वोट चोरी के आरोपों पर राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से लोगों के नाम हटाए गए हैं और नियमों तथा कानूनों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा कि देश में कथित तौर पर वोटों की चोरी की जा रही है और इसे चुपचाप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सवाल पूछने वालों पर लाठियां चलाई गईं, लेकिन अब देश जवाब देगा। राहुल गांधी ने लोगों से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि वोट नागरिकों का अधिकार है और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सभी की है।
विपक्षी गठबंधन की यह मुहिम मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों पर केंद्रित है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
1 नवंबर की तारीख पर BJP ने क्यों जताई आपत्ति?
दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली की तारीख को लेकर भाजपा ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि 1 नवंबर की तारीख 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी से जुड़ी है। ऐसे में इस दिन राजनीतिक रैली आयोजित करने से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर सिख समुदाय के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाने का आरोप लगाया और रैली की तारीख बदलने की मांग की।
हालांकि, राहुल गांधी ने भाजपा की आपत्तियों के जवाब में तंज कसते हुए कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी जिस तरह रैली का प्रचार कर रहे हैं, उसके लिए वह उनके आभारी हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगले सात दिनों तक भी इसी तरह प्रचार जारी रखा जाए।
इस बयान के बाद रैली की तारीख को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
व्यापारियों ने भी रैली पर जताई चिंता
1 नवंबर को प्रस्तावित रैली का विरोध कुछ कारोबारी संगठनों ने भी किया है। दिल्ली के चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने आशंका जताई है कि त्योहारी सीजन के दौरान रैली आयोजित होने से बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है।
संगठन ने राहुल गांधी से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया है। CTI के मुताबिक, रैली के कारण करीब 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।
फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑफ इंडिया ने भी प्रस्तावित रैली को लेकर विरोध जताया है। कारोबारियों की चिंता मुख्य रूप से त्योहारों के दौरान बाजारों में भीड़, यातायात प्रतिबंध और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर भी विपक्ष की तैयारी
वोट चोरी के आरोपों को लेकर विपक्षी दलों ने अपनी राजनीतिक मुहिम तेज करने की तैयारी की है। इसी क्रम में 30 अक्टूबर को दिल्ली के होटल अशोक में मॉक संसद आयोजित करने की योजना बताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग जैसी राजनीतिक प्रक्रिया चलाने की योजना भी है। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ऐसी किसी प्रक्रिया की संवैधानिक और कानूनी स्थिति को लेकर औपचारिक महाभियोग की प्रक्रिया से अंतर समझना जरूरी है।
विपक्षी गठबंधन की प्रस्तावित महारैली का उद्देश्य मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करना है। दूसरी ओर, भाजपा और कारोबारी संगठनों की आपत्तियों ने रैली की तारीख को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है।
फिलहाल 1 नवंबर की रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। राहुल गांधी ने जहां भाजपा के विरोध को अपने अभियान के प्रचार के रूप में पेश किया है, वहीं भाजपा और कारोबारी संगठनों ने तारीख बदलने की मांग उठाई है।
