कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम तोलगा की अंजना उरांव ने साबित कर दिया कि अवसर कभी भी, कहीं से भी मिल सकता है—बस उसे पहचानने की दृष्टि चाहिए। जनपद पंचायत खड़गवां में अंशकालिक डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में मात्र चार हजार रुपये मानदेय पर कार्यरत अंजना के जीवन में बदलाव की शुरुआत एक फटे कागज से हुई, जो उन्हें कार्यालय के डस्टबिन में मिला। उस कागज पर प्रधानमंत्री सृजन स्वरोजगार योजना की जानकारी थी। अंजना ने इसे अवसर के रूप में देखा और उद्यमिता की राह पकड़ ली।
योजना की जानकारी लेने पर उन्हें कई तरह की प्रतिक्रियाएं मिलीं—किसी ने हतोत्साहित किया, तो किसी ने औपचारिक सलाह दी। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से जानकारी लेकर उन्होंने फ्लाईऐश ईंट निर्माण इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया।
इसके बाद शुरू हुआ संघर्ष—दस्तावेजों की लंबी प्रक्रिया, बैंकों के चक्कर और ऋण अस्वीकृतियां। परिवार और समाज से भी निराशा मिली, लेकिन उनके पति अनिल कुमार ने हर कदम पर साथ दिया। अंततः बैकुंठपुर स्थित एचडीएफसी बैंक से 30 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। कटघोरा से मशीनें मंगाई गईं, शेड का निर्माण हुआ और कोरबा से फ्लाईऐश सहित अन्य सामग्री की व्यवस्था की गई।
अगस्त 2025 में इकाई का लोकार्पण हुआ और अक्टूबर 2025 से उत्पादन शुरू हुआ। आज ‘अंजना इंटरप्राइजेज’ फ्लाईऐश ब्रिक्स इकाई में लगभग 80 हजार ईंटों का निर्माण हो चुका है। अंजना हर माह 60 हजार रुपये की बैंक किश्त नियमित जमा कर रही हैं। खेती, परिवार और उद्योग—तीनों का संतुलन बनाए रखते हुए वे आगे बढ़ रही हैं। चार एकड़ भूमि पर धान और गेहूं की खेती भी जारी है।
ईंटों की बढ़ती मांग को देखते हुए उनका लक्ष्य प्रतिदिन 15 हजार ईंट उत्पादन और प्रतिमाह 6 से 7 लाख रुपये के कारोबार का है। वे जल्द ही ईंटों के भंडारण के लिए लकड़ी की ट्रॉली (पीढ़ा) खरीदने वाली हैं।
अंजना कहती हैं, “जिस डस्टबिन को लोग कचरा समझते हैं, उसी ने मुझे मेरी पहचान दी। जहां से भी ज्ञान मिले, उसे अपनाइए।”
जिला प्रशासन ने भी उनके प्रयासों की सराहना की है और उन्हें अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया है।
अंजना उरांव की यह यात्रा बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, दृढ़ निश्चय और मेहनत मिलकर किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकते हैं।
