भारतीय बैडमिंटन के प्रमुख चेहरों में शामिल श्रीकांत किदांबी आज अपना 33वां जन्मदिन मना रहे हैं। आंध्र प्रदेश से निकलकर विश्व बैडमिंटन मंच पर भारत का नाम रोशन करने वाले श्रीकांत ने अपने खेल, अनुशासन और जुझारूपन से अलग पहचान बनाई है।
07 फरवरी 1993 को जन्मे श्रीकांत के बड़े भाई नंदगोपाल स्वयं बैडमिंटन खिलाड़ी रहे हैं। परिवार के इसी खेल वातावरण ने श्रीकांत को कम उम्र में ही रैकेट थामने की प्रेरणा दी। शुरुआती प्रशिक्षण और भाई से मिली सीख ने उनके खेल करियर की मजबूत नींव रखी।
श्रीकांत ने पुरुष एकल में विश्व नंबर-1 रैंकिंग हासिल कर भारतीय बैडमिंटन इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की। उन्होंने ऑस्ट्रेलियन ओपन, इंडोनेशियन ओपन और सैयद मोदी इंटरनेशनल जैसे बड़े खिताब जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया।
हाल के समय में भी श्रीकांत ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। मलेशिया मास्टर्स 2025 में लंबे अंतराल के बाद सेमीफाइनल तक पहुंचकर उन्होंने वापसी के संकेत दिए। कनाडा ओपन 2025 में शीर्ष खिलाड़ी चाउ तियेन चेन को सीधे सेटों में हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। स्विस ओपन में एच.एस. प्रणॉय पर जीत से उनका आत्मविश्वास बढ़ा, हालांकि यूएस ओपन 2025 के शुरुआती दौर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2026 बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप में भी उन्होंने कोरिया के खिलाड़ी पर जीत दर्ज की।
श्रीकांत की खेल यात्रा युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। सीमित संसाधनों से अंतरराष्ट्रीय सफलता तक पहुंचने की उनकी कहानी बताती है कि लगन, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता से बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।
जन्मदिन के अवसर पर खेल जगत और प्रशंसक उन्हें उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सफलता की शुभकामनाएं दे रहे हैं।
