Solar Storm : नई दिल्ली। दुनिया ने मंगलवार रात (20 जनवरी 2026) एक असाधारण खगोलीय घटना देखी, जब पिछले दो दशकों में सबसे शक्तिशाली सौर तूफान (Solar Storm) पृथ्वी से टकराया। इस तेज सोलर रेडिएशन स्टॉर्म के कारण दुनिया के कई हिस्सों में आसमान रंगीन रोशनी से जगमगा उठा और दुर्लभ ऑरोरा (नॉर्दर्न लाइट्स) का शानदार नज़ारा देखने को मिला।
इस सौर तूफान का असर उन इलाकों तक भी दिखा, जहां आमतौर पर ऑरोरा दिखाई नहीं देता। कैलिफोर्निया, ग्रीनलैंड, ऑस्ट्रिया, जर्मनी समेत कई देशों में लोगों ने आसमान में चमकती हरी, लाल और बैंगनी रोशनियां देखीं। हालांकि, इस खूबसूरत नज़ारे के साथ-साथ सैटेलाइट्स, जीपीएस सिस्टम और स्पेस-बेस्ड टेक्नोलॉजी में कुछ तकनीकी रुकावटें भी दर्ज की गईं।
2003 के बाद सबसे गंभीर सौर तूफान
स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर (SWPC) के अनुसार, इस सोलर स्टॉर्म को तीव्रता के पैमाने पर 5 में से 4 (S4 कैटेगरी) रैंक दी गई है। एजेंसी ने बताया कि यह पिछले 20 वर्षों में दर्ज किया गया सबसे शक्तिशाली सोलर रेडिएशन स्टॉर्म है। इससे पहले इस स्तर का तूफान अक्टूबर 2003 में आया था, जिसे “हैलोवीन स्टॉर्म्स” के नाम से जाना जाता है। उस समय स्वीडन में बिजली गुल हो गई थी और दक्षिण अफ्रीका में कई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को नुकसान पहुंचा था।
SWPC ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस तरह के तूफान अंतरिक्ष अभियानों, विमानन सेवाओं और सैटेलाइट ऑपरेशंस को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
कैसे शुरू हुआ यह जियोमैग्नेटिक तूफान
Space.com की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म तब शुरू हुआ जब सूर्य से निकला हाई-स्पीड सोलर रेडिएशन क्लाउड पृथ्वी के वातावरण से टकराया। सूर्य की सतह पर हुई तीव्र गतिविधि ने भारी मात्रा में ऊर्जावान कणों को अंतरिक्ष में भेजा, जिसने पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड के साथ टकराकर यह प्रभाव पैदा किया।

क्या होता है सोलर स्टॉर्म और क्यों हो रहा ट्रेंड
सोलर स्टॉर्म तब बनता है, जब सूर्य से अत्यधिक ऊर्जा वाले चार्ज्ड पार्टिकल्स (जैसे इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन) तेजी से बाहर निकलते हैं। जब ये कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं, तो वे सैटेलाइट्स, जीपीएस, रेडियो कम्युनिकेशन और स्पेस टेक्नोलॉजी को प्रभावित कर सकते हैं। इसी टकराव के कारण वातावरण में ऊर्जा भरती है और ऑरोरा जैसी रोशनी दिखाई देती है।
S4 कैटेगरी के सौर तूफान बेहद दुर्लभ होते हैं और आमतौर पर सूर्य के 11 साल के सौर चक्र के चरम दौर में देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि यह घटना वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गई है।
ऑरोरा क्या है और कैसे बनता है
जब सौर तूफान के दौरान सूर्य से निकले कण पृथ्वी की ओर बढ़ते हैं, तो पृथ्वी का मैग्नेटिक फील्ड उन्हें सीधे सतह तक पहुंचने से रोक देता है और ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर मोड़ देता है। वहां ये कण ऊपरी वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन और नाइट्रोजन गैसों से टकराते हैं। इस टकराव से निकलने वाली ऊर्जा रंगीन रोशनी के रूप में दिखाई देती है, जिसे ऑरोरा कहा जाता है।
ऑक्सीजन से हरी और लाल रोशनी, जबकि नाइट्रोजन से नीली और बैंगनी रोशनी बनती है। तेज सोलर स्टॉर्म के दौरान ये रोशनियां ज्यादा चमकीली हो जाती हैं और दूर-दराज के इलाकों में भी नजर आने लगती हैं।
कब तक असर रहेगा
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोलर रेडिएशन का असर कई दिनों तक बना रह सकता है। इस दौरान इसकी तीव्रता में उतार-चढ़ाव संभव है। स्पेस वेदर एजेंसियां लगातार हालात पर नजर रख रही हैं और जरूरत पड़ने पर आगे भी अलर्ट जारी किए जाएंगे।
