संत पवन दीवान: छत्तीसगढ़ की महान विभूति
संत पवन दीवान छत्तीसगढ़ के प्रख्यात कवि, ओजस्वी वक्ता, प्रखर नेता और सुप्रसिद्ध कथा वाचक थे। उन्होंने अपने साहित्य, राजनीति और आध्यात्मिक विचारों से समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। उनकी कविताएँ जनचेतना जागृत करने वाली थीं, वहीं कथा वाचन और प्रवचनों के माध्यम से उन्होंने लाखों लोगों के हृदय में आध्यात्मिकता का संचार किया।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
संत पवन दीवान का जन्म 12 जनवरी 1945 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में हुआ था। बचपन से ही वे साहित्य, आध्यात्म और समाजसेवा की ओर आकर्षित थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति और संत परंपरा का गहरा अध्ययन किया, जिससे आगे चलकर वे एक विद्वान प्रवचनकर्ता और समाज सुधारक बने।
साहित्य और कवि रूप में पहचान
संत पवन दीवान को छत्तीसगढ़ के ओजस्वी कवियों में गिना जाता है। उनकी कविताएँ वीररस, आध्यात्म और जनचेतना से भरपूर थीं। वे छत्तीसगढ़ी और हिंदी भाषा में समान रूप से निपुण थे।
उनकी ओजस्वी वाणी से निकले हुए शब्द लोगों के दिलों में गूंजते थे। वे कवि सम्मेलनों में अपनी प्रभावी प्रस्तुति के लिए जाने जाते थे और उनकी रचनाएँ आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय थीं।
राजनीतिक जीवन और समाजसेवा
संत पवन दीवान सिर्फ साहित्य और आध्यात्म तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। वे छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद पहले धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री बने।
राजनीति में रहते हुए भी उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया और सदैव जनसेवा को प्राथमिकता दी।
संत, प्रवचनकर्ता और कथा वाचक
वे केवल कवि और नेता ही नहीं, बल्कि एक श्रेष्ठ संत और कथा वाचक भी थे। उन्होंने श्रीरामचरितमानस, श्रीमद्भागवत और अन्य धार्मिक ग्रंथों का सरल भाषा में प्रवचन किया, जिससे वे जन-जन के प्रिय बन गए। उनकी वाणी में जोश, भक्ति और सत्यता का संगम था।
निधन और विरासत
संत पवन दीवान का निधन 11 सितंबर 2017 को रायपुर, छत्तीसगढ़ में हुआ। उनके जाने से छत्तीसगढ़ ने एक महान संत, कवि और समाजसेवी को खो दिया।
उनकी पुण्यतिथि और जयंती पर हर साल साहित्यिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि उनकी विचारधारा और योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया जा सके।
नमन और श्रद्धांजलि
“छत्तीसगढ़ की माटी के सपूत, ओजस्वी कवि, संत, समाजसेवी और राजनेता संत पवन दीवान जी को कोटि-कोटि नमन। उनका जीवन सदैव प्रेरणा देता रहेगा।”
