मुंबई। फिल्मकार संजय लीला भंसाली एक बार फिर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित भव्य कहानी लेकर आ रहे हैं। ‘पद्मावत’, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘राम लीला’, ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ और ‘ब्लैक’ जैसी चर्चित फिल्मों के बाद अब वह ‘जय सोमनाथ’ के जरिए आस्था, संघर्ष और पुनर्निर्माण की गाथा को बड़े पर्दे पर पेश करने की तैयारी में हैं। भंसाली प्रोडक्शन के बैनर तले बन रही इस फिल्म का निर्देशन केतन मेहता कर रहे हैं। यह फिल्म सोमनाथ मंदिर के इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को उजागर करेगी, जिसने भारतीय सांस्कृतिक चेतना पर गहरा प्रभाव डाला है।
फिल्म की पहली झलक में सोमनाथ मंदिर के विध्वंस का दृश्य दिखाया गया है, जहां धूल और मलबे के बीच इतिहास की त्रासदी नजर आती है। इसके बाद उसी धुंध से मंदिर के पुनर्निर्माण की छवि उभरती है, जो यह संदेश देती है कि आस्था को नष्ट नहीं किया जा सकता। “मंदिर तोड़ा जा सकता है, लेकिन आस्था को नहीं” यह टैगलाइन फिल्म की मूल भावना को दर्शाती है, जो विनाश से पुनर्जन्म तक की यात्रा को दिखाएगी।
इतिहास के अनुसार 1025-26 ईस्वी में महमूद गजनवी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर उसे भारी नुकसान पहुंचाया था। हालांकि, यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है। बार-बार आक्रमणों के बावजूद इसका पुनर्निर्माण होता रहा, जो भारतीय संस्कृति के अदम्य साहस को दर्शाता है।
‘जय सोमनाथ’ की रिलीज 2027 में प्रस्तावित है, हालांकि इसकी स्टारकास्ट और सटीक रिलीज डेट की घोषणा अभी नहीं की गई है। इसके अलावा संजय लीला भंसाली की एक और बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘लव एंड वॉर’ भी चर्चा में है। माना जा रहा है कि इतिहास, भव्यता और भावनात्मक गहराई का संगम ‘जय सोमनाथ’ को आने वाले समय की चर्चित फिल्मों में शामिल कर सकता है।
