रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 31 अगस्त 2025 को भारतीय बौद्ध महासभा की प्रदेश कार्यकारिणी का पुनर्गठन ऐतिहासिक उत्साह और एकजुटता के साथ सम्पन्न हुआ। रायपुर के एक निजी होटल में हुई इस बैठक की अध्यक्षता ट्रस्टी चेयरमैन चन्द्रबोधि पाटील ने की। इस दौरान संस्था के राष्ट्रीय महासचिव शंकर राव ढेंगरे, ट्रस्टी एस.आर. कानडे, अलका बोरकर और राष्ट्रीय संघटक संस्कार सी.डी. खोबरागड़े की उपस्थिति ने बैठक को विशेष महत्व प्रदान किया।
बैठक में सर्वसम्मति से भोजराज गौरखेड़े को भारतीय बौद्ध महासभा छत्तीसगढ़ का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। वहीं बेनीराम गायकवाड को महासचिव और नीलकंठ सिंगाड़े को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
प्रदेश में बौद्ध आंदोलन को नई ऊर्जा
इस पुनर्गठन को बौद्ध समाज के लिए बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि नए नेतृत्व के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में बौद्ध आंदोलन और भी मज़बूती से आगे बढ़ेगा।
बैठक में रायपुर, बिलासपुर, धमतरी, दुर्ग, भिलाई, महासमुंद, बालोद, खैरागढ़, नारायणपुर, बीजापुर, कोंडागांव सहित 14 जिलों से आए पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने सर्वसम्मति से समर्थन देते हुए संगठन की एकजुटता और विस्तार की दिशा में काम करने का संकल्प लिया।

सामाजिक न्याय और शिक्षा पर होगा फोकस
नवनिर्वाचित अध्यक्ष भोजराज गौरखेड़े ने अपने वक्तव्य में कहा कि आने वाले समय में संगठन शिक्षा, सामाजिक न्याय और समाज की प्रगति को प्राथमिकता देगा। महासचिव बेनीराम गायकवाड ने युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, वहीं कोषाध्यक्ष नीलकंठ सिंगाड़े ने संगठन को आर्थिक रूप से और मज़बूत बनाने का संकल्प लिया।
राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगी छत्तीसगढ़ की भूमिका
बैठक में मौजूद राष्ट्रीय महासचिव शंकर राव ढेंगरे ने कहा कि छत्तीसगढ़ हमेशा से बौद्ध आंदोलन की मजबूत धुरी रहा है और पुनर्गठन के बाद यहाँ की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और भी अहम होगी।
