प्रोजेक्ट उन्नति के तहत दी जा रही रूरल मेशन ट्रेनिंग
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत मुंगेली जिले में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) के लिए आवश्यक मिस्त्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु प्रोजेक्ट उन्नति के तहत जिले के 35 श्रमिकों को रूरल मेशन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह 30 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, कोनी-सेंदरी, बिलासपुर में संचालित किया जा रहा है।
पात्र श्रमिकों का चयन और प्रशिक्षण व्यवस्था
इस प्रशिक्षण में वही श्रमिक शामिल किए गए हैं—
- जिन्होंने पिछले वर्षों में कम से कम 60 मानव दिवस मनरेगा में कार्य किया है।
- जिनकी आयु 18 से 45 वर्ष के बीच है।
प्रशिक्षण के दौरान श्रमिकों को प्रधानमंत्री आवास निर्माण स्थलों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें बुनियादी राजमिस्त्री कार्य से लेकर उन्नत निर्माण तकनीकों तक का अभ्यास कराया जा रहा है।
संस्थान द्वारा सभी प्रतिभागियों को निःशुल्क सेफ्टी किट — हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, तथा आवश्यक निर्माण उपकरण (करनी, शाहुल, टेप, धागा आदि) उपलब्ध कराए गए हैं।
प्रशिक्षण संचालन में सहायक परियोजना अधिकारी विनायक गुप्ता तथा कार्यक्रम अधिकारी अशोक साहू का विशेष योगदान रहा।
कौशल विकास से बढ़ेगा आत्मनिर्भरता का मार्ग
अधिकारियों ने मनरेगा श्रमिकों के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे—
- श्रमिकों को नियमित रोजगार मिलेगा
- आत्मविश्वास और आय दोनों में वृद्धि होगी
- उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर बढ़ेगा
पिछले वर्ष जनपद पंचायत पथरिया के ग्राम कपुवा में भी 35 श्रमिकों को ऐसी ही रूरल मेशन ट्रेनिंग दी गई थी। उनमें से अधिकांश आज प्रधानमंत्री आवास एवं निजी निर्माण कार्यों में 600–700 रुपये प्रतिदिन की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं।
इससे न केवल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि जिले में प्रधानमंत्री आवास निर्माण के लिए कुशल मिस्त्रियों की उपलब्धता भी सुदृढ़ हुई है।
