INS Vaghshir Submarine: नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने कर्नाटक दौरे के दौरान एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। कारवार स्थित नेवल बेस से उन्होंने भारतीय नौसेना की स्वदेशी कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी INS वाघशीर पर सवार होकर पश्चिमी समुद्री तट पर समुद्री यात्रा की। इस महत्वपूर्ण अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी भी राष्ट्रपति के साथ मौजूद रहे।
क्यों ऐतिहासिक है यह यात्रा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी पर यात्रा करने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं। इससे पहले केवल पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने वर्ष 2006 में पनडुब्बी से यात्रा की थी। इस तरह किसी भी राष्ट्रपति द्वारा यह दूसरी पनडुब्बी यात्रा मानी जा रही है, जो भारतीय नौसेना के लिए भी गर्व का क्षण है।
INS वाघशीर की खासियत
INS वाघशीर प्रोजेक्ट-75 के तहत निर्मित अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक आक्रमण पनडुब्बी है। यह पनडुब्बी भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का सशक्त उदाहरण है। यह समुद्र के भीतर गुप्त अभियानों, निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन के जहाजों व पनडुब्बियों के खिलाफ सटीक कार्रवाई करने में सक्षम है।
INS वाघशीर की ताकत और तकनीक
INS वाघशीर में 4 एमटीयू 12V 396 SE84 डीजल इंजन और 360 बैटरी सेल्स लगे हैं। यह पनडुब्बी सतह पर करीब 20 किमी प्रति घंटे और पानी के भीतर 37 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। इसकी लंबाई लगभग 221 फीट, चौड़ाई 20 फीट और ऊंचाई करीब 40 फीट है। आधुनिक तकनीक से लैस यह पनडुब्बी लंबी दूरी तक मिशन को अंजाम देने में सक्षम है।
नौसेना के मनोबल को मिलेगा बल
राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा भारतीय नौसेना के साहस, तकनीकी दक्षता और पेशेवर प्रतिबद्धता को मजबूती देती है। साथ ही यह सशस्त्र बलों के प्रति सर्वोच्च नेतृत्व के विश्वास और समर्थन का भी स्पष्ट संदेश देती है।
जब डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने की थी पनडुब्बी यात्रा
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पनडुब्बी में यात्रा करने वाले भारत के पहले राष्ट्राध्यक्ष थे। 13 फरवरी 2006 को उन्होंने ईस्टर्न नेवल कमांड के तहत विशाखापट्टनम से बंगाल की खाड़ी में कुछ घंटों की पनडुब्बी यात्रा की थी। उस समय नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश और पनडुब्बी के कमांडर पी.एस. बिष्ट उनके साथ थे। यात्रा के बाद डॉ. कलाम ने इसे अपना पहला और अविस्मरणीय अनुभव बताया था।
