नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र में बुधवार को उस समय हंगामे का माहौल बन गया, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए। इन विधेयकों को लेकर विपक्षी सांसदों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और बिल की प्रतियां फाड़कर गृह मंत्री की ओर फेंक दीं। हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी बवाल जारी रहा, जिसके बाद तीनों विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का फैसला लिया गया।
विपक्ष का तीखा विरोध
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जैसे ही विधेयकों को JPC को भेजने की सिफारिश की, विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ सांसदों ने बिल की कॉपियों को फाड़कर विरोध जताया और उन्हें गृह मंत्री की ओर फेंक दिया। इस घटना ने सदन में तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
JPC को भेजे गए तीन विधेयक
अमित शाह ने जिन तीन विधेयकों को पेश किया, वे हैं:
- संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025: यह विधेयक संविधान में संशोधन से संबंधित है।
- केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025: यह केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों से संबंधित प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव करता है।
- जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025: यह जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन से संबंधित है।
इन विधेयकों को व्यापक विचार-विमर्श के लिए संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया है, जिसमें 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्य शामिल होंगे। JPC को अगले संसद सत्र में अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
विपक्ष का आरोप
विपक्षी सांसदों ने इन विधेयकों को जल्दबाजी में पेश करने का आरोप लगाया और इसे गैर-लोकतांत्रिक करार दिया। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ये विधेयक शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं और जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के अधिकारों को कमजोर करते हैं। विपक्ष ने यह भी दावा किया कि सरकार इन विधेयकों के जरिए गैर-भाजपा शासित राज्यों को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है।
सरकार का रुख
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इन विधेयकों को पेश करते हुए कहा कि यह गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार हुए नेताओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम संवैधानिक नैतिकता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।