प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पूर्वी भारत दशकों तक घृणा और विभाजन की राजनीति के कारण विकास की दौड़ में पिछड़ता रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी राजनीति ने न केवल विकास को रोका, बल्कि लोगों को अवसरों से भी वंचित किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र की वास्तविक क्षमता को सामने लाने के लिए विकास-केंद्रित और सुशासन आधारित शासन अनिवार्य है।
मालदा में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में पूर्वी भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास ही “विकसित भारत” के निर्माण की कुंजी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार का फोकस विकास, आधारभूत संरचना और जनकल्याण पर है, जिसके चलते पूर्वी भारत अब देश की विकास गाथा में मजबूती से जुड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने पूर्वी राज्यों को विभाजनकारी और नफरत से प्रेरित राजनीति के चंगुल से मुक्त किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान शिवेंदु शेखर राय को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मालदा की पहचान और विरासत को संरक्षित करने में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय विरासत का संरक्षण विकास और सांस्कृतिक गौरव के साथ संतुलन बनाकर किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर भी तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण और हिंसा की राजनीति का प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल को ऐसी सरकार की आवश्यकता है जो विकास और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। प्रधानमंत्री ने राज्य में राजनीतिक परिवर्तन का आह्वान करते हुए कहा कि जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में मौजूदा सरकार विफल रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि भाजपा की नीतियां पूर्वी भारत को विकास के नए अवसरों से जोड़ रही हैं और आने वाले समय में यह क्षेत्र देश की प्रगति का मजबूत स्तंभ बनेगा।
