Magh Mela 2026 : प्रयागराज। प्रयागराज के संगम तट पर चल रहे माघ मेले में देशभर से श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। इस बार मेले में कई अनोखे साधु-संत अपनी अनूठी साधना और रूपों के कारण चर्चा में हैं, जिनमें सबसे अधिक ध्यान खींच रहे हैं ‘सेंट बाबा’।
सेंट बाबा की विशेषता
सेंट बाबा एक नागा संन्यासी हैं, जो आंखों पर काला चश्मा पहनकर पूरे शरीर में भस्म लगाकर धूनी में लीन रहते हैं। भक्त उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं और बाबा उन्हें सेंट (इत्र/परफ्यूम) छिड़ककर आशीर्वाद देते हैं। यह सेंट बाबा श्मशान घाट से लाते हैं और इसे भक्तों को प्रसाद के रूप में देते हैं।
सेंट बाबा का असली नाम बाबा बालक दास उर्फ नारायण भूमि है। वे श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन से जुड़े हुए हैं और उनका गुरु स्थान पंजाब के अमृतसर में है। बाबा ने मात्र 13 वर्ष की उम्र में घर छोड़कर संन्यास धारण कर लिया और अब वे 17 साल से संन्यासी जीवन जी रहे हैं।

भक्तों को भक्ति और संगीत से आकर्षित
सेंट बाबा केवल अपने अनोखे रूप और भस्म लगाकर साधना करने के कारण ही नहीं, बल्कि अपने भजनों और गीतों के जरिए भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। बाबा ने कहा कि फैशन या वस्तुएं चाहे जितनी भी हों, जीवन में कोई भी चीज़ स्थायी नहीं है। उनका यह संदेश भक्तों के लिए गहन अर्थ रखता है।
सेंट बाबा ने यह भी बताया कि सेंट लगाने का उद्देश्य यह है कि संस्कारी व्यक्ति पर नकारात्मक शक्तियों का असर नहीं होगा, और जो व्यक्ति संन्यास अपना चुका है, उस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
भक्ति का केंद्र बने सेंट बाबा
माघ मेले में सेंट बाबा के दर्शन करने वालों की भीड़ रोजाना बढ़ती जा रही है। भक्त उनकी साधना, भजन और आशीर्वाद को देख कर प्रभावित हो रहे हैं। बाबा की अनोखी साधना और पारंपरिक भस्म लगाकर रहना, उन्हें माघ मेले का एक विशेष आकर्षण बना रहा है।
