न्यूयॉर्क। अमेरिकी H-1B वीजा शुल्क में 1 लाख डॉलर की वृद्धि और ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों से उपजे तनाव के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की 80वीं सत्र की साइडलाइंस पर हुई इस मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों को सुधारने और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
यह पहली फेस-टू-फेस मुलाकात है, जब से ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा के नए आवेदनों पर एकमुश्त 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाने का फैसला किया है, जो भारतीय आईटी पेशेवरों और कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा, भारत की रूसी तेल खरीद पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने से कुल शुल्क 50% हो गया है, जिससे व्यापारिक संबंधों में खटास आई है। बैठक में इन मुद्दों के अलावा आपसी निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग, रक्षा साझेदारी और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर चर्चा हुई।
ट्रेड डील की दिशा में कदम
जानकारों का कहना है कि यह बैठक भविष्य में संभावित व्यापार समझौते की नींव रख सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हालिया टेलीफोनिक बातचीत ने राजनीतिक संवाद के द्वार खोले हैं, जिससे संबंधों में गति आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व का है, और इन मुद्दों पर बातचीत से समाधान निकल सकता है।

UNGA सत्र में जयशंकर की व्यस्तता
जयशंकर रविवार को न्यूयॉर्क पहुंचे थे और उन्होंने फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा पी. लाजारो के साथ द्विपक्षीय बैठक से UNGA सप्ताह की शुरुआत की। वे पूरे सप्ताह द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे तथा 27 सितंबर को UNGA के सामान्य बहस में भारत का राष्ट्रीय बयान देंगे। इस सत्र में UN के 80वें वर्षगांठ, जलवायु महत्वाकांक्षा शिखर सम्मेलन और बीजिंग घोषणा के 30 वर्ष जैसे विषय शामिल हैं।
