नई दिल्ली/न्यूयॉर्क।
भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या पाकिस्तान की अपील पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक बुलाई गई है। हाल ही में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति और भारत के कथित कदमों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है। इस बीच सोशल मीडिया और कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स में यह दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के आग्रह पर UNSC की एक आपात बैठक बुलाई गई है।
क्या सच में हुई UNSC की बैठक?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की है कि बैठक विशेष रूप से पाकिस्तान की अपील पर बुलाई गई है। हालाँकि, परिषद के नियमित एजेंडे के तहत दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पर विचार किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, कुछ सदस्य देशों — विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान — इस मुद्दे को परिषद में उठाना चाहते हैं, लेकिन वास्तविक चर्चा या प्रस्ताव की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
UNSC की मौजूदा संरचना
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं जिन्हें वीटो का विशेषाधिकार प्राप्त है:
- अमेरिका
- रूस
- चीन
- ब्रिटेन
- फ्रांस
इनके अलावा 10 अस्थायी सदस्य इस समय परिषद का हिस्सा हैं:
- पाकिस्तान
- अल्जीरिया
- डेनमार्क
- ग्रीस
- गुयाना
- पनामा
- दक्षिण कोरिया
- सिएरा लियोन
- स्लोवेनिया
- सोमालिया
इनमें से कुछ देश पाकिस्तान के साथ खड़े हो सकते हैं, लेकिन कोई भी प्रस्ताव तभी पारित हो सकता है जब उसे कम से कम 9 मतों का समर्थन मिले और कोई स्थायी सदस्य वीटो का प्रयोग न करे।
भारत की स्थिति
भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार उठा कर दुनिया को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप को अस्वीकार करता है।
आगे क्या हो सकता है?
- बैठक केवल चर्चा तक सीमित रह सकती है, किसी प्रस्ताव की संभावना बेहद कम है।
- यदि चीन या पाकिस्तान कोई प्रस्ताव लाते भी हैं, तो अमेरिका, फ्रांस या रूस जैसे देश वीटो का प्रयोग कर सकते हैं।
- भारत इस मुद्दे पर अपने मित्र देशों से समर्थन जुटाने में सक्षम है, जिससे प्रस्ताव पारित नहीं हो पाएगा।
निष्कर्ष:
UNSC में पाकिस्तान की अपील पर कोई ठोस प्रस्ताव पास होने की संभावना नहीं है। भारत को लेकर किसी भी फैसले पर स्थायी सदस्यों की सहमति जरूरी होगी, जो फिलहाल नजर नहीं आती। पाकिस्तान की यह कोशिश महज राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति मानी जा रही है।