नेपाल में बढ़ते संकट की पूरी कहानी: ‘राजा राज करेगा’ के नारे क्यों गूंज रहे हैं?
नेपाल इन दिनों जबरदस्त राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के कारण जनता का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई जगहों पर बांग्लादेश जैसे विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। लोगों की नाराजगी इतनी बढ़ गई है कि वे अब फिर से राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।
नेपाल में विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
नेपाल में कई वजहों से जनता सड़कों पर उतर रही है। इनमें मुख्य कारण आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता हैं।
1. आर्थिक संकट और महंगाई का कहर
नेपाल इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। महंगाई दर तेजी से बढ़ रही है, और रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। पेट्रोल, डीजल, गैस, अनाज और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। इससे आम जनता की जिंदगी मुश्किल हो गई है।
- नेपाली रुपये की गिरावट: डॉलर के मुकाबले नेपाली मुद्रा कमजोर हो रही है, जिससे आयात महंगा हो गया है।
- बेरोजगारी: नेपाल में रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं, जिससे युवा खासतौर पर परेशान हैं।
- महंगाई: खाने-पीने की चीजें महंगी होने से आम जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
2. भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा
नेपाल में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या बन चुका है। सरकार और प्रशासन के कई शीर्ष अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए हैं। जनता को लगता है कि सरकार सिर्फ अपने फायदे के लिए काम कर रही है और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।
3. राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता संघर्ष
नेपाल में पिछले कुछ वर्षों में बार-बार सरकारें बदली हैं। राजनीतिक पार्टियां आपस में सत्ता के लिए लड़ रही हैं, लेकिन देश की समस्याओं को हल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही हैं।
- लगातार बदलती सरकारें: पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में कई बार प्रधानमंत्री बदले गए हैं। इससे राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है।
- नेताओं में मतभेद: राजनीतिक पार्टियों के बीच विवाद और गुटबाजी चरम पर है।
- जनता की अनदेखी: सरकारें केवल सत्ता बचाने में लगी हैं, जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
‘राजा आऊ, देश बचाऊ’ – क्यों गूंज रहे हैं ये नारे?
नेपाल में एक बड़ा तबका अब यह मानने लगा है कि लोकतंत्र उनके लिए फायदेमंद नहीं रहा। वे मानते हैं कि जब देश में राजशाही थी, तब हालात बेहतर थे। इसलिए अब वे फिर से राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।
- राजा ज्ञानेंद्र शाह की बढ़ती लोकप्रियता: नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के प्रति समर्थन बढ़ रहा है। लोग मानते हैं कि उनके शासनकाल में नेपाल ज्यादा स्थिर और आर्थिक रूप से मजबूत था।
- राजशाही समर्थकों का बढ़ता प्रभाव: नेपाल में राजशाही समर्थक समूह तेजी से सक्रिय हो रहे हैं और बड़े स्तर पर रैलियां निकाल रहे हैं।
- लोकतंत्र से मोहभंग: लोग मानते हैं कि लोकतंत्र ने सिर्फ भ्रष्टाचार और अस्थिरता बढ़ाई है, जबकि राजशाही के समय देश ज्यादा सुरक्षित और समृद्ध था।
नेपाल में बांग्लादेश जैसी स्थिति क्यों?
नेपाल की मौजूदा स्थिति बांग्लादेश जैसी हो गई है, जहां हाल ही में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे। बांग्लादेश में भी सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश फूटा था, और सड़कों पर भारी हिंसा हुई थी।
नेपाल में भी:
- सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो रहे हैं।
- महंगाई और बेरोजगारी ने जनता को सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया है।
- भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से लोगों का सरकार से भरोसा उठ रहा है।
- सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हो रही हैं।
क्या नेपाल में फिर लौटेगी राजशाही?
नेपाल में राजशाही 2008 में खत्म हुई थी और देश गणतंत्र बना था। लेकिन अब फिर से राजशाही की मांग उठने लगी है। हालांकि, नेपाल में राजनीतिक दल और सरकार इस मांग का विरोध कर रहे हैं।
अगर हालात नहीं सुधरे तो नेपाल में स्थिति और बिगड़ सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस संकट से कैसे निपटती है और क्या जनता की मांगें पूरी होती हैं या नहीं।