Aarti Direction Tips: हिंदू धर्म में आरती को पूजा का सबसे पवित्र और अंतिम चरण माना गया है। माना जाता है कि आरती के बिना पूजा अधूरी रहती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार आरती करते समय की गई एक छोटी-सी गलती पूरे पूजा-पाठ के फल को प्रभावित कर सकती है? इनमें सबसे आम गलती है आरती की थाली को गलत दिशा में घुमाना।
धार्मिक ग्रंथों और ऊर्जा विज्ञान दोनों के अनुसार, आरती हमेशा दक्षिणावर्त (Clockwise) दिशा में ही घुमाई जानी चाहिए। इसके पीछे गहरी आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और ऊर्जात्मक मान्यताएँ जुड़ी हैं।
Aarti Direction Tips: दक्षिणावर्त दिशा ही क्यों सही मानी जाती है?
1. ब्रह्मांड की प्राकृतिक लय से जुड़ा नियम
ब्रह्मांड में ऊर्जा का प्रवाह मुख्यतः दक्षिणावर्त दिशा में होता है।
- पृथ्वी अपनी धुरी पर दक्षिणावर्त घूमती है।
- अधिकतर ग्रहों की परिक्रमा भी इसी दिशा में होती है।
- जल जब भंवर बनाता है, तो वह भी दक्षिणावर्त दिशा में घूमता है।
इसलिए जब आरती दक्षिणावर्त दिशा में की जाती है, तो यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ सामंजस्य स्थापित करती है और पूजा को अधिक प्रभावी बनाती है।
2. सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिणावर्त दिशा में आरती करने से शक्तिशाली सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। यह ऊर्जा—
- घर के वातावरण को शुद्ध करती है,
- नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है,
- मन और वातावरण में शांति भरती है।
3. आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि
दक्षिणावर्त में आरती घुमाने से उत्पन्न स्पंदन सीधे भक्त की ओर आकर्षित होते हैं। इससे—
- आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है,
- मन एकाग्र होता है,
- पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है।
Aarti Direction Tips: धार्मिक रहस्य: प्रदक्षिणा और सृष्टि का नियम
1. प्रदक्षिणा का महत्व
हिन्दू परंपरा में देवता की परिक्रमा हमेशा दक्षिणावर्त दिशा में की जाती है।
आरती उसी प्रदक्षिणा का सूक्ष्म रूप है।
इसलिए आरती की थाली को दक्षिणावर्त घुमाना देवी-देवताओं के प्रति सम्मान और समर्पण का प्रतीक है।
2. सृष्टि का चक्र और दक्षिणावर्त गति
दक्षिणावर्त दिशा जन्म, जीवन, मृत्यु और मोक्ष के चक्र का प्रतीक मानी जाती है।
यह बताती है कि हर जीवात्मा ईश्वर के केंद्र के चारों ओर घूमता है और अंत में उसी में विलीन हो जाता है।
Aarti Direction Tips: ये गलती कभी न करें
पूजा से पहले या आरती के दौरान थाली को उल्टी दिशा (वामावर्त) में न घुमाएँ।
इसे पूजा की शुद्धता और ऊर्जा प्रवाह के लिए प्रतिकूल माना जाता है।
आरती की दिशा केवल परंपरा नहीं, बल्कि धार्मिक, वैज्ञानिक और ऊर्जा-सिद्धांतों पर आधारित है। इसलिए अगली बार आरती करते समय हमेशा ध्यान रखें—
आरती की थाली को दक्षिणावर्त दिशा में ही घुमाएँ।
यही पूजा को पूर्ण, सकारात्मक और फलदायी बनाती है।
