रायपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री कवासी लखमा के घर पर छापेमारी की। यह कार्रवाई शराब घोटाले से जुड़े मामले की जांच के तहत की गई। ED ने रायपुर, धमतरी और सुकमा जिलों में कुल 7 स्थानों पर छापे मारे, जिसमें महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों और डिजिटल डिवाइसों की जब्ती की गई।
शराब घोटाले की जांच का विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय ने यह छापेमारी छत्तीसगढ़ में हुए बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े साक्ष्यों को इकट्ठा करने के लिए की। अधिकारियों के अनुसार, घोटाले से जुड़े आर्थिक लेन-देन और डिजिटल माध्यम से हुए लेन-देन की पड़ताल के लिए कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं। इनमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं।
पूर्व मंत्री के घर से क्या मिला?
पूर्व मंत्री कवासी लखमा के घर पर की गई छापेमारी में ED ने कई दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए हैं। माना जा रहा है कि इनसे घोटाले से जुड़े लेन-देन और आपसी संवाद के अहम सुराग मिल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी इन डिवाइसों के जरिए उन व्यक्तियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जो इस घोटाले में शामिल हो सकते हैं।
रायपुर, धमतरी और सुकमा में छापेमारी
ED की टीम ने रायपुर के अलावा धमतरी और सुकमा जिलों में भी छापेमारी की। कुल 7 स्थानों पर की गई इस कार्रवाई के दौरान कई अहम दस्तावेज़ और संपत्तियों के रिकॉर्ड्स जब्त किए गए। अधिकारियों ने बताया कि इन छापों का उद्देश्य घोटाले की परतें खोलना और इसमें शामिल अन्य लोगों को भी उजागर करना है।
शराब घोटाले का विवाद
छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला लंबे समय से राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है। इस मामले में कई उच्च अधिकारियों और नेताओं के नाम सामने आ चुके हैं। ED पहले भी इस मामले में छापेमारी कर चुकी है और कई लोगों से पूछताछ की है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने इस छापेमारी को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उन्हें और उनके परिवार को बदनाम करने की साजिश है। लखमा ने कहा, “मैंने हमेशा ईमानदारी से काम किया है। ED की इस कार्रवाई का सच जल्द ही सामने आएगा।”
वहीं, विपक्षी दलों ने इस छापेमारी को घोटाले के खिलाफ सही कदम बताते हुए कहा कि घोटाले में शामिल सभी दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
आगे की जांच जारी
ED ने यह स्पष्ट किया है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। जब्त किए गए दस्तावेज़ों और डिजिटल डिवाइसों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच एजेंसी का मानना है कि इनसे घोटाले में शामिल कई बड़े नाम उजागर हो सकते हैं।
