साइबर विशेषज्ञों ने फ्री पब्लिक Wi-Fi नेटवर्क को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। हैकर्स अब “Evil Twin” नामक तकनीक का इस्तेमाल कर असली नेटवर्क जैसे नाम वाले फर्जी Wi-Fi हॉटस्पॉट बना रहे हैं। लोग एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मॉल या कैफे में मुफ्त इंटरनेट समझकर जैसे ही इन नेटवर्क से जुड़ते हैं, उनका मोबाइल और इंटरनेट ट्रैफिक हैकर के नियंत्रण में चला जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान यूजर द्वारा टाइप किया गया पासवर्ड, बैंकिंग पिन, UPI डिटेल, ईमेल लॉगिन जैसी संवेदनशील जानकारी सीधे हैकर के सर्वर तक पहुंच सकती है। पब्लिक Wi-Fi नेटवर्क हैकिंग के लिए सबसे आसान निशाना माने जाते हैं।
क्या-क्या हो सकता है लीक?
सिर्फ डेटा चोरी ही नहीं, साइबर अपराधी आपके डिवाइस में मालवेयर भी इंस्टॉल कर सकते हैं। इससे मोबाइल का कैमरा, माइक्रोफोन और लोकेशन बिना जानकारी के एक्सेस की जा सकती है। गैलरी में मौजूद निजी फोटो-वीडियो चोरी होकर डार्क वेब पर बेचे जाने का भी खतरा रहता है।
बैंकिंग और UPI पर सबसे बड़ा खतरा
टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पब्लिक Wi-Fi पर बैंकिंग या UPI ट्रांजेक्शन करना बेहद जोखिम भरा है। कमजोर सुरक्षा के कारण ट्रांजेक्शन बीच में हाईजैक हो सकता है। यूजर को लगेगा कि भुगतान हो गया, जबकि पैसा हैकर के खाते में जा सकता है।
मजबूरी में Free Wi-Fi इस्तेमाल करना पड़े तो क्या करें?
- VPN का उपयोग करें: भरोसेमंद VPN डेटा को एन्क्रिप्ट करता है, जिससे हैकर उसे पढ़ नहीं पाते।
- ऑटो-कनेक्ट बंद रखें: फोन की सेटिंग में Wi-Fi Auto-Connect फीचर तुरंत बंद करें।
- संवेदनशील लॉगिन से बचें: पब्लिक नेटवर्क पर बैंकिंग, शॉपिंग, ईमेल या सोशल मीडिया लॉगिन न करें।
- HTTPS और Padlock देखें: केवल उन्हीं वेबसाइट्स पर जाएं जिनके URL में
https://और लॉक का चिन्ह हो। - 2FA अनिवार्य करें: बैंक, UPI और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी वित्तीय और निजता संबंधी हानि से बचा सकती है। मुफ्त Wi-Fi का लालच आपकी डिजिटल सुरक्षा पर भारी पड़ सकता है।
