नारायणपुर । देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री पुरस्कार 2025 से छत्तीसगढ़ के प्रख्यात जनजातीय वाद्ययंत्र निर्माता और काष्ठ शिल्पकार पंडीराम मंडावी को सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
कौन हैं पंडीराम मंडावी?
पंडीराम मंडावी, छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के गोंड मुरिया जनजाति से ताल्लुक रखते हैं। वे बांस से बनी बस्तर बांसुरी, जिसे स्थानीय भाषा में ‘सुलुर’ कहा जाता है, के विशेषज्ञ माने जाते हैं। इसके साथ ही वे लकड़ी पर उभरे चित्रों, मूर्तियों और अन्य पारंपरिक शिल्पों के निर्माण में भी दक्ष हैं।
उन्होंने मात्र 12 वर्ष की उम्र में अपने पूर्वजों से इस कला की शिक्षा ली थी। अपनी लगन और समर्पण के बल पर उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोककला को देश-विदेश में पहचान दिलाई है।
पंडीराम मंडावी ने अब तक 8 से अधिक देशों में भारतीय सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल के रूप में भाग लेकर अपनी कला का प्रदर्शन किया है।
इसके साथ ही उन्होंने 1,000 से अधिक युवा कारीगरों को प्रशिक्षण देकर पारंपरिक शिल्पकला को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया है।
पारंपरिक वाद्ययंत्रों के संरक्षक
68 वर्षीय पंडीराम मंडावी नारायणपुर जिले के ग्राम गढ़बेंगाल निवासी हैं। वे बीते पांच दशकों से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वाद्ययंत्र कला और काष्ठ शिल्प को संरक्षित और संवर्धित करने में जुटे हैं।
उन्होंने बांसुरी, टेहण्डोंड, डूसीर, कोटोड़का, सिंग की तोड़ी, उसूड़ जैसे वाद्ययंत्रों के निर्माण और मंचीय प्रदर्शन में अद्वितीय दक्षता हासिल की है। उनके द्वारा निर्मित वाद्ययंत्र लोककला की आत्मा को जीवंत करते हैं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाते हैं।

विदेशों तक पहुंची छत्तीसगढ़ की लोककला
पंडीराम मंडावी की कला यात्रा भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रही। वे अब तक रूस, फ्रांस, जर्मनी, जापान और इटली जैसे देशों में भारत का सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनकी प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि भारत की पारंपरिक कला को वैश्विक मंचों पर प्रतिष्ठा दिलाई है।
राज्य सरकार से भी सम्मानित
छत्तीसगढ़ शासन ने वर्ष 2024 में उन्हें “दाऊ मंदराजी सम्मान” से सम्मानित किया था। यह पुरस्कार उन कलाकारों को दिया जाता है जो छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को जीवित रखने में उल्लेखनीय योगदान देते हैं।

जिले से पद्मश्री पाने वाले दूसरे व्यक्ति
इस सम्मान के साथ पंडीराम मंडावी, नारायणपुर जिले के दूसरे नागरिक बन गए हैं जिन्हें पद्मश्री मिला है। इससे पूर्व वर्ष 2024 में पारंपरिक वैद्य हेमचंद मांझी को यह सम्मान प्राप्त हुआ था।
पंडीराम की इस उपलब्धि से जिले में गर्व और उत्साह का माहौल है। स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने इसे जिले के लिए एक प्रेरणादायक उपलब्धि बताया है।
प्रमुख तथ्य संक्षेप में:
- पंडीराम मंडावी को पद्मश्री सम्मान 2025 प्रदान किया गया
- 50 वर्षों से पारंपरिक वाद्य और काष्ठ शिल्प कला को कर रहे संरक्षित
- रूस, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली में किया भारत का प्रतिनिधित्व
- वर्ष 2024 में मिला था दाऊ मंदराजी सम्मान
- नारायणपुर जिले के दूसरे पद्मश्री सम्मानित व्यक्ति बने
