छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नीति आयोग द्वारा “Fostering Mentorship in Education: A Pathway to Equity” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने में मेंटॉरशिप (मार्गदर्शन) की भूमिका पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार करना था। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने ड्रॉपआउट दर घटाने, युवाओं को कौशल एवं अवसरों से जोड़ने पर अपने विचार साझा किए।
“मेंटॉरशिप युवाओं को सशक्त करने की कुंजी है” – वित्त मंत्री चौधरी
विशेष अतिथि के रूप में शामिल वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि शिक्षा में समानता और सशक्तिकरण की दिशा में मेंटरशिप की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल विकास पर केंद्रित है और साझा राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने का अवसर है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की औसत आयु 24 वर्ष है, जो देश की औसत आयु से कम है। यह राज्य की सबसे बड़ी ताकत है और युवाओं को अर्थव्यवस्था से जोड़ना आवश्यक है। चौधरी ने अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि औपचारिक शिक्षा के बावजूद कई युवाओं को करियर की दिशा स्पष्ट नहीं होती। इसे कैरियर गाइडेंस और मेंटरशिप से दूर किया जा सकता है।
उन्होंने स्थानीय भाषा और संस्कृति आधारित शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में बच्चों को उनकी जीवनशैली से जोड़कर अक्षर ज्ञान देना चाहिए। साथ ही नवोदय विद्यालय जैसे मॉडल अपनाने और शिक्षा में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई।
“हर बच्चे को मेंटरशिप मिलना उसका अधिकार है” – डॉ. वी. के. पॉल
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने कहा कि शिक्षा मानव पूंजी निर्माण का आधार है और हर बच्चे को समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि—
- प्राथमिक स्तर पर नामांकन 93% है, लेकिन अपर प्राइमरी में 3% बच्चे छूट जाते हैं।
- सेकेंडरी स्तर पर केवल 56% और 12वीं तक सिर्फ 23% छात्र पहुँचते हैं।
- 2019 से 2023 तक केंद्रीय विश्वविद्यालयों से 15,000 ओबीसी, एससी, एसटी छात्र पढ़ाई छोड़ चुके हैं, जबकि आईआईटी और आईआईएम से 4,000 से अधिक छात्र बाहर हुए।
उन्होंने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय क्षति है। मेंटरशिप छात्रों को मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और जीवन कौशल प्रदान करती है। शिक्षकों का माइंडसेट बदलना, तकनीक के माध्यम से छात्रों तक पहुँचना और विषाक्त वातावरण व नशे जैसी चुनौतियों से बचाव जरूरी है।
डॉ. पॉल ने कहा कि हर बच्चे को मेंटरशिप मिलना उसका मानवाधिकार है और एनईपी 2020 इस दिशा में सही मार्ग दिखाती है।
कार्यशाला में उपस्थित
इस अवसर पर योजना विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, नीति आयोग के संयुक्त सचिव श्री के. एस. रेजिमोन, नीति आयोग के फेलो डॉ. आई. वी. सुब्बा राव (आईएएस, सेवानिवृत्त), राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा तथा नीति आयोग के उप सचिव श्री अरविंद कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।