सिरपुर, छत्तीसगढ़ की प्राचीन और गौरवशाली धरोहर सिरपुर अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने की ओर निर्णायक कदम बढ़ा चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा नामांकन प्रक्रिया को तीव्र गति दी जा रही है। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के हालिया सिरपुर दौरे से राज्य सरकार का दावा और अधिक मजबूत हुआ है।
छठी शताब्दी से बहुधार्मिक शहरी केंद्र के रूप में विकसित सिरपुर में बौद्ध, जैन, हिंदू तथा शैव-वैष्णव परंपराओं का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। यहां लक्ष्मण मंदिर, आनंद प्रभु कुटी विहार, तीवरदेव विहार, सुरंग टीला, प्राचीन आवासीय परिसर, बाजार और नदी घाटों सहित 125 से अधिक खुदाई स्थल मौजूद हैं, जिन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और राज्य पुरातत्व विभाग ने संयुक्त रूप से दस्तावेजित किया है।

यूनेस्को मानकों के अनुरूप संरक्षण, प्रस्तुति और आगंतुक प्रबंधन को लेकर ASI और राज्य पर्यटन एजेंसियों द्वारा विस्तृत निरीक्षण पूर्ण किया जा चुका है। नवंबर 2025 तक की रिपोर्ट केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को भेजी जा चुकी है, जिसकी दिसंबर में अंतिम समीक्षा भी हो चुकी है। नए वर्ष में सिरपुर को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है, जिससे छत्तीसगढ़ को अपना पहला विश्व धरोहर स्थल मिलेगा।
01 जनवरी 2026 को केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के साथ सिरपुर का दौरा कर प्रमुख स्थलों का निरीक्षण किया। उन्होंने मूल संरचनाओं के संरक्षण और बेहतर कनेक्टिविटी के निर्देश दिए। शेखावत ने कहा कि सिरपुर कभी इस क्षेत्र की राजधानी रहा है और इसकी पुरासंपदा हजार वर्षों के विकास की जीवंत कहानी कहती है। उन्होंने पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को छत्तीसगढ़ की पहचान को नई ऊंचाई देने वाला बताया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सिरपुर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा है। यूनेस्को मान्यता से राज्य को वैश्विक पहचान मिलेगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उनके निर्देश पर 125 खुदाई स्थलों को समेटते हुए एक समग्र मास्टर प्लान तैयार किया गया है।
पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि सिरपुर को वैश्विक पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां बैटरी ई-कार्ट, 3-डी इंटरप्रेटेशन सेंटर, होम-स्टे क्लस्टर, हेरिटेज शटल, गाइडेड वॉक, चार हेरिटेज सर्किट, डिजिटल साइनेज और स्वच्छता व्यवस्था विकसित की जा रही है। स्थानीय समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए गाइड प्रशिक्षण, हस्तशिल्प बाजार और ईको-फ्रेंडली स्टे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि सिरपुर का प्राचीन नाम श्रिपुरा था, जो महानदी के तट पर बसी दक्षिण कोसल की राजधानी रही है। यहां खुदाई में 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 10 बौद्ध विहार और 3 जैन विहार के अवशेष मिले हैं। यह स्थल हिंदू-बौद्ध-जैन परंपराओं का दुर्लभ संगम है, जिसकी तुलना अंगकोरवाट और बोधगया से की जाती है। यूनेस्को टैग मिलने से सिरपुर को वैश्विक फंडिंग, दस हजार से अधिक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार और लगभग 500 करोड़ रुपये के पर्यटन राजस्व की संभावनाएं हैं।
