रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी माना। कोर्ट ने उम्रकैद के साथ 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर छह माह की अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी।
ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा
हाई कोर्ट ने 31 मई 2007 को आए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। उस समय रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एक ही साक्ष्य के आधार पर कुछ आरोपियों को सजा देना और कथित मुख्य साजिशकर्ता को बरी करना न्यायसंगत नहीं है।
2003 में हुई थी हत्या
4 जून 2003 को रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से दो सरकारी गवाह बन गए थे। पहले के फैसले में 28 लोगों को सजा हुई थी, जबकि अमित जोगी को राहत मिली थी।
बाद में जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए हाई कोर्ट भेज दिया था, जिसके बाद अब यह अहम फैसला सामने आया है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी में अहम भूमिका निभाते थे।
इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज होने की संभावना है, क्योंकि यह मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है।
