मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय गोवा में आयोजित आदि लोकोत्सव पर्व–2025 में हुए शामिल
रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज गोवा के आदर्श ग्राम अमोन, पोंगुइनिम में आयोजित ‘आदि लोकोत्सव पर्व–2025’ में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने लोकोत्सव को संबोधित करते हुए आयोजन को लोकसंस्कृति, जनजातीय गौरव और राष्ट्रबोध का जीवंत संगम बताया तथा सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. रमेश तावड़कर भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘आदि लोकोत्सव’ की सराहना करते हुए कहा कि यह देश की आदिम और लोक संस्कृति से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम है, जो भारत की लोक-सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत गांवों का देश है और गांव ही हमारी आत्मा हैं। गांवों की संस्कृति ही देश की संस्कृति है, जिसे लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और परंपराओं के माध्यम से संजोकर रखना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवा सरकार पिछले 25 वर्षों से इस सांस्कृतिक परंपरा को सहेजने का कार्य कर रही है, जो अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में आदि लोकोत्सव और भी व्यापक एवं भव्य स्वरूप में आयोजित होगा।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री साय ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि जनजातीय इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। भगवान बिरसा मुंडा ने मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में अंग्रेजों को चुनौती देकर अपने साहस और नेतृत्व से इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के अनेक महापुरुषों को लंबे समय तक इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय सेनानियों को देशव्यापी सम्मान और पहचान दिलाने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने रानी दुर्गावती के बलिदान का स्मरण करते हुए उन्हें जनजातीय समाज की महान वीरांगना बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मध्यप्रदेश के जबलपुर में रानी दुर्गावती के गौरव को स्थायी रूप देने के लिए भव्य संग्रहालय का निर्माण कराया है, जो उनके शौर्य और बलिदान की अमिट स्मृति है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि राज्य की लगभग 32 प्रतिशत आबादी जनजातीय समाज से है। छत्तीसगढ़ के 14 जनजातीय महापुरुषों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर और गेंद सिंह जैसे महापुरुषों का उल्लेख करते हुए कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह को अंग्रेजों ने रायपुर के जय स्तंभ चौक में फांसी दी थी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन वीरों की स्मृति को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक उनकी गाथा पहुंचाने के उद्देश्य से नया रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह डिजिटल संग्रहालय का निर्माण किया गया है। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है, जिसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किया। उन्होंने आदि लोकोत्सव में उपस्थित सभी लोगों को छत्तीसगढ़ आकर इस संग्रहालय को देखने का आमंत्रण भी दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज के लिए यह गर्व का विषय है कि आज देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के रूप में जनजातीय समाज की बेटी सुशोभित हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में आदिवासी समाज का मुख्यमंत्री बनना प्रधानमंत्री श्री मोदी की समावेशी सोच का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के योगदानों को याद करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में ही देश में पहली बार आदिम जाति कल्याण मंत्रालय का गठन हुआ, जिसके माध्यम से आज 12 करोड़ से अधिक जनजातीय नागरिकों के कल्याण के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की बदलती छवि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य को पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और छत्तीसगढ़ शांति, विकास और निवेश के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने बताया कि नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जो छत्तीसगढ़ के आर्थिक भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं।
