रायपुर। छत्तीसगढ़ के पवित्र त्रिवेणी संगम राजिम में आयोजित राजिम कुंभ (कल्प) 2025 का भव्य समापन समारोह संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ डिप्टी सीएम अरुण साव, मंत्री विजय शर्मा और अन्य कैबिनेट मंत्री भी उपस्थित रहे। समापन समारोह में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और धार्मिक, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।
मुख्यमंत्री ने की पूजा-अर्चना और गंगा आरती
राजिम कुंभ के समापन समारोह से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुलेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की और राजिम लोचन मंदिर में भगवान विष्णु के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ महानदी के तट पर गंगा आरती में भाग लिया।

देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चले इस राजिम कुंभ (कल्प) 2025 में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान संत समागम, कथा-प्रवचन, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। कुंभ मेले में साधु-संतों के प्रवचनों से श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गए।
सांस्कृतिक संध्या में सुरेश वाडेकर की प्रस्तुति
समापन समारोह के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड के प्रसिद्ध पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर ने अपनी मधुर आवाज से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने आध्यात्मिक और भक्ति संगीत की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
मुख्य मंच पर मुख्यमंत्री समेत कई मंत्री रहे मौजूद
समारोह के मुख्य मंच पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, दयालदास बघेल और विधायक संपत अग्रवाल भी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया और राजिम कुंभ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करने का संकल्प लिया।

राजिम कुंभ: आस्था और संस्कृति का संगम
राजिम कुंभ (कल्प) 2025 का समापन समारोह आस्था, संस्कृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम बना, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और दिव्य अनुभूति प्राप्त की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़ की धार्मिक पहचान का प्रतीक बताते हुए इसे और भव्य बनाने का संकल्प लिया।

➡ महाशिवरात्रि के अवसर पर राजिम कुंभ का यह समापन ऐतिहासिक और यादगार बन गया, जिसमें श्रद्धालुओं को भक्ति, अध्यात्म और संस्कृति का अनुपम अनुभव प्राप्त हुआ।
