छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को देखते हुए पुलिस विभाग ने अपने शासकीय वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का निर्णय लिया है। इन दिनों पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ियों और अन्य सरकारी वाहनों पर लोहे की मजबूत जालियां लगाई जा रही हैं। यह कदम हाल के महीनों में राज्य के कई जिलों में हुई भीड़ हिंसा, पथराव और पुलिस पर हमले की घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिनमें कई जवान घायल हुए थे।
पुलिस मुख्यालय के निर्देश
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में पुलिस मुख्यालय स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत थानों और पुलिस लाइनों में उपलब्ध सभी शासकीय वाहनों के साथ-साथ पेट्रोलिंग में लगी गाड़ियों पर भी सुरक्षा जालियां लगाई जा रही हैं। उद्देश्य यह है कि कानून-व्यवस्था के दौरान अचानक होने वाले हमलों से पुलिसकर्मियों को अधिकतम सुरक्षा मिल सके।
अफसरों की गाड़ियों पर भी सुरक्षा जाल
यह व्यवस्था केवल पेट्रोलिंग वाहनों तक सीमित नहीं रहेगी। राजपत्रित अधिकारियों की शासकीय गाड़ियों पर भी लोहे की जालियां लगाने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि संवेदनशील इलाकों में अफसरों की आवाजाही के दौरान यह कदम जोखिम को काफी हद तक कम करेगा।
किराए की गाड़ियों पर बढ़ेगी चुनौती
पुलिस विभाग द्वारा किराए पर ली गई निजी गाड़ियों को लेकर सबसे बड़ी चुनौती सामने आ सकती है। कई महंगी निजी गाड़ियां पेट्रोलिंग और कानून-व्यवस्था के काम में लगी हैं। यदि इन पर भी जालियां लगाने का आदेश लागू होता है, तो वाहन मालिकों की असहजता स्वाभाविक है। हालांकि विभाग का मानना है कि इन गाड़ियों में भी पुलिस अधिकारी और जवान ही सवार रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा उतनी ही जरूरी है।
ड्राइवरों को हो सकती है परेशानी
कुछ मामलों में सामने की ओर लगी जालियों से वाहन चालकों को दिन और रात दोनों समय देखने में दिक्कत हो सकती है, खासकर संकरे रास्तों और तेज रफ्तार के दौरान। इसे ध्यान में रखते हुए जालियों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें ऊपर उठाया जा सके, ताकि ड्राइविंग में ज्यादा बाधा न आए।
कुल मिलाकर, पुलिस विभाग का यह फैसला जवानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
