नई दिल्ली। कई बार महीने के आखिर में आर्थिक तंगी ऐसी हो जाती है कि जरूरी खर्चों के लिए भी सोचना पड़ता है। ऐसे समय में अगर LIC पॉलिसी की किश्त भरने की तारीख नजदीक आ जाए, तो टेंशन होना स्वाभाविक है। पैसों की कमी के कारण कई लोग प्रीमियम नहीं भर पाते और उनकी पॉलिसी लैप्स हो जाती है, जिससे बीमा सुरक्षा के साथ-साथ सालों की बचत भी खतरे में पड़ जाती है। लेकिन नौकरीपेशा लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है आप अपने PF अकाउंट से LIC की किश्त भर सकते हैं।
EPFO की खास सुविधा से मिलेगी राहत
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने सदस्यों को यह सुविधा देता है कि वे अपने EPF खाते में जमा रकम से LIC पॉलिसी का प्रीमियम भर सकें। इस सुविधा के जरिए आपको अपनी जेब से तत्काल पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और आपकी पॉलिसी भी सुरक्षित रहेगी।
कौन उठा सकता है इस सुविधा का लाभ
EPF स्कीम के पैरा 68(DD) के तहत यह सुविधा सभी के लिए नहीं है। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं—
- आप EPFO के एक्टिव मेंबर होने चाहिए
- आपके PF खाते में कम से कम दो महीने की सैलरी के बराबर बैलेंस होना जरूरी है
- जिस LIC पॉलिसी का प्रीमियम भरा जा रहा है, वह केवल आपके नाम पर होनी चाहिए
- पत्नी, पति या बच्चों के नाम की पॉलिसी का भुगतान PF से नहीं किया जा सकता
- यह सुविधा सिर्फ LIC की पॉलिसी के लिए है, किसी निजी बीमा कंपनी के लिए नहीं
घर बैठे पूरी हो जाएगी प्रक्रिया
अब PF से जुड़े कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए आपको EPFO पोर्टल पर ऑनलाइन ‘फॉर्म-14’ भरना होगा।
इसके लिए UAN और पासवर्ड से EPFO की वेबसाइट पर लॉग इन करें। KYC सेक्शन में जाकर LIC पॉलिसी का विकल्प चुनें और पॉलिसी नंबर समेत जरूरी जानकारी भरें। एक बार पॉलिसी PF अकाउंट से लिंक हो जाने के बाद, प्रीमियम की तय तारीख पर राशि अपने आप PF बैलेंस से कटकर LIC को ट्रांसफर हो जाएगी।
फायदे और सावधानियां दोनों जरूरी
इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आर्थिक तंगी के समय आपकी पॉलिसी लैप्स नहीं होगी और आपको किसी से उधार लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही लेट फीस या पेनल्टी का भी डर खत्म हो जाता है।
हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों की मानें तो PF का पैसा आपके रिटायरमेंट के लिए होता है। इसमें से बार-बार पैसा निकालने से भविष्य में मिलने वाली रकम कम हो सकती है, क्योंकि PF पर चक्रवृद्धि ब्याज का फायदा मिलता है। इसलिए इस सुविधा का इस्तेमाल रोजमर्रा की आदत बनाने के बजाय केवल आपातकालीन विकल्प के तौर पर करना ही समझदारी है।
