छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित माँ दंतेश्वरी मंदिर बस्तर संभाग की आराध्य देवी और भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर बस्तर की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रमुख प्रतीक है।
ऐतिहासिक महत्व
माना जाता है कि यहां वह स्थान है जहां देवी सती के दांत गिरे थे, इसलिए इसका नाम पड़ा “दंतेवाड़ा” (दांत + वाड़ा)।
यही कारण है कि इस मंदिर का स्थान माता के 52 शक्तिपीठों में विशेष महत्व रखता है।
स्थापना
- मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में काकतीय राजवंश के शासकों द्वारा कराया गया।
- काकतीयों को कला और मंदिर निर्माण के लिए जाना जाता था, जिसका प्रतिबिंब दंतेश्वरी मंदिर की संरचना में आज भी देखा जा सकता है।
स्थान और प्राकृतिक परिवेश
यह मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदियों के पवित्र संगम पर स्थित है, जिससे यह स्थल अत्यंत दिव्य और शांत दिखाई देता है।
क्यों विशेष?
- दो नदियों का संगम
- घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा क्षेत्र
- प्राकृतिक और आध्यात्मिक सौंदर्य का अनोखा संगम
वास्तुकला की खूबसूरती

दंतेश्वरी मंदिर द्रविड़ और नागर शैली की मिश्रित वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मंदिर की खास विशेषताएँ:
- मुख्य गर्भगृह में माँ दंतेश्वरी की काले पत्थर की मूर्ति स्थापित
- मंदिर में बने चार द्वार — स्वर्ण, रजत, तांबे और लोहे के प्रतीक
- मंदिर परिसर में पुरातात्त्विक और काकतीय काल की मूर्तियों का संग्रह
- परिसर में मौजूद दीपस्तंभ और नक्काशी अद्भुत कला का परिचय देते हैं
धार्मिक महत्व
- माँ दंतेश्वरी को बस्तर की कुलदेवी माना जाता है।
- बस्तर अंचल के सभी प्रमुख त्योहारों, परंपराओं और उल्लास का केंद्र यही मंदिर है।
विशेष आयोजन:
1. बस्तर दशहरा
- भारत का सबसे लंबा चलने वाला, 75 दिनों तक चलने वाला त्योहार
- माँ दंतेश्वरी इसमें साक्षात देवी शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं
- छिंदक नगर की प्राचीन परंपराओं को आज भी अक्षुण्ण रखता है
2. नवरात्री
- हजारों श्रद्धालु देवी के दर्शन के लिए आते हैं
- विशेष अनुष्ठान, पूजन और जागरण आयोजित
कैसे पहुंचें?
- दंतेवाड़ा, रायपुर से लगभग 400 किमी दूर
- नजदीकी रेलवे स्टेशन: दंतेवाड़ा / जगदलपुर
- नजदीकी एयरपोर्ट: जगदलपुर एयरपोर्ट
- सड़क मार्ग से बस और टैक्सी उपलब्ध
आसपास के दर्शनीय स्थल
- बरसूर का गणेश मंदिर
- बाली राजा का मंदिर
- दंतेवाड़ा का शंखिनी-डंकिनी संगम
- बस्तर का लोंगेपाल क्षेत्र
- चित्रकोट व तीर्तयानी जलप्रपात (जगदलपुर क्षेत्र)
संक्षेप में
माँ दंतेश्वरी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा है।
यहाँ की परंपरा, आस्था, शक्ति और इतिहास एक ही स्थान पर जीवंत रूप में दिखाई देता है।
