वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेमीकंडक्टर चिप बनाने वाली कंपनियों को चेतावनी दी है कि यदि वे अमेरिका में निवेश नहीं करती हैं, तो उन पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा। वहीं, अमेरिका में निवेश करने वाली कंपनियों को इस टैरिफ से छूट मिलेगी।
ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि उनकी सरकार अब सेमीकंडक्टर चिप के आयात पर टैरिफ लगाने पर विचार कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टैरिफ सिर्फ उन कंपनियों के लिए होगा, जो अमेरिका में चिप प्लांट स्थापित करने या निवेश करने की योजना नहीं बना रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन कंपनियों ने अमेरिका में निवेश करने का निर्णय लिया है या इसके लिए विचार कर रही हैं, उन्हें किसी प्रकार का टैरिफ नहीं लगेगा। ट्रंप की इस नीति का मकसद अमेरिका में निवेश को बढ़ावा देना और देश के ‘अमेरिका फर्स्ट’ आर्थिक एजेंडे को मजबूत करना है।

टैरिफ से मार्केट में उथल-पुथल
राष्ट्रपति ट्रंप की लगातार टैरिफ धमकियों के चलते वैश्विक बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। इस नीति को व्यापार युद्ध के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप का मानना है कि टैरिफ के जरिए अमेरिका उन देशों और कंपनियों पर दबाव डाल सकता है, जो अमेरिका से व्यापार कर रहे हैं, और लंबे समय से जारी व्यापार घाटे को कम किया जा सकता है।
कोर्ट में मामला
ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के खिलाफ कई संघीय अदालतों में अपील की गई है। एक संघीय अदालत ने पहले ही इन टैरिफ को अवैध घोषित किया था, यह आरोप लगाते हुए कि राष्ट्रपति ने संविधान द्वारा प्राप्त अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया। इसके खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
