नई दिल्ली। विश्वकर्मा जयंती हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह पर्व सृष्टि के रचयिता भगवान विश्वकर्मा के जन्मदिवस के अवसर पर मनाया जाता है। साल 2025 में यह पूजा 17 सितंबर, बुधवार को होगी। राजस्थान, हरियाणा और पंजाब सहित कई राज्यों में इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
भगवान विश्वकर्मा का महत्व
विश्वकर्मा को इस संसार का पहला शिल्पकार, वास्तुकार और इंजीनियर माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस संसार में जो भी निर्माण हो रहा है, वह भगवान विश्वकर्मा की कृपा से संभव है। इस दिन उनकी विधिवत पूजा करने से सुख-समृद्धि, सौभाग्य और कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 17 सितंबर को रात 12:21 बजे से पूजा आरंभ होगी। श्रद्धालु अपनी सुविधा अनुसार स्नान-ध्यान करके भगवान विश्वकर्मा की विधिवत पूजा कर सकते हैं।
विशेष योग और संयोग
इस वर्ष विश्वकर्मा जयंती पर कई शुभ योग बन रहे हैं। इसमें परिघ योग, शिव योग और शिववास योग शामिल हैं। मान्यता है कि इन विशेष योगों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

पूजा करने की विधि
विश्वकर्मा जयंती पर कामकाज में उपयोग होने वाले औजार, मशीनें और लोहे के उपकरण विशेष रूप से साफ किए जाते हैं। इसके बाद एक पवित्र चौकी पर भगवान विष्णु और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर पूजा की जाती है।
पूजन में मौसमी फल, मिष्ठान, पंचमेवा और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। धूप-दीप जलाकर आरती की जाती है और कामकाज में प्रयुक्त औजारों पर तिलक और पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

विश्वकर्मा पूजा के दौरान श्रद्धा-भाव से पूजा करने से कार्यस्थल में सफलता, व्यवसाय में उन्नति और जीवन में समृद्धि का मार्ग खुलता है।
