वॉशिंगटन/पेरिस : अमेरिका ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र की शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संस्था UNESCO से बाहर होने का ऐलान किया है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने इस फैसले के पीछे इजराइल के खिलाफ पक्षपात, और UNESCO की कार्यप्रणाली को अमेरिकी राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध बताया है।
“UNESCO निष्पक्षता से भटक गया है”: अमेरिकी विदेश विभाग
अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा “आज, अमेरिका ने UNESCO से बाहर निकलने का निर्णय लिया है। यह संस्था अब निष्पक्षता के मार्ग से भटक चुकी है।”
इजराइल के खिलाफ “प्रोपेगेंडा अड्डा” बना UNESCO: ट्रंप प्रशासन
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि UNESCO वर्षों से इजराइल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अधिकारों की अनदेखी कर रहा है और एकतरफा निर्णय लेता है। ट्रंप पहले भी संगठन पर इजराइल के खिलाफ पूर्वाग्रहपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते रहे हैं।
इस फैसले को 2025 के दिसंबर से लागू किया जाएगा।
फिलिस्तीन को पूर्ण सदस्यता से भी अमेरिका नाराज़
अमेरिका की नाराज़गी सिर्फ इजराइल के मुद्दे पर नहीं है। UNESCO द्वारा फिलिस्तीन को पूर्ण सदस्यता दिए जाने पर भी अमेरिका ने कड़ा विरोध जताया है। ब्रूस ने कहा कि यह निर्णय अमेरिका की विदेश नीति के बिल्कुल खिलाफ है और इससे संगठन के भीतर इजराइल-विरोधी सोच को बल मिला है।
तीसरी बार UNESCO से बाहर हुआ अमेरिका
यह तीसरी बार है जब अमेरिका UNESCO से बाहर हुआ है:
1984 में रोनाल्ड रीगन सरकार ने पहली बार संस्था छोड़ी थी।
2018 में ट्रंप प्रशासन ने दूसरी बार UNESCO से अलग होने का ऐलान किया।
2023 में जो बाइडेन प्रशासन ने फिर से अमेरिका को सदस्य बनाया, लेकिन अब 2025 में फिर से बाहर जाने की घोषणा हो चुकी है।
फ्रांस ने जताया खेद, कहा– हम UNESCO के साथ हैं
अमेरिका के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा “UNESCO विज्ञान, महासागर, शिक्षा, संस्कृति और विश्व धरोहर की वैश्विक संरक्षक संस्था है। फ्रांस इसका समर्थन करता रहेगा।”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की वापसी से संस्था का मिशन कमजोर नहीं होगा।
