भारतीय संस्कृति और ज्योतिषशास्त्र में पशु-पक्षियों की गतिविधियों को भविष्य से जुड़े संकेतों के रूप में देखा जाता है। इन्हीं में से एक है दीवारों पर रेंगने वाली छिपकली। शकुन और वास्तुशास्त्र के अनुसार, छिपकली का शरीर पर गिरना सिर्फ एक संयोग नहीं बल्कि भविष्य की किसी घटना का संकेत भी माना जाता है।
गौली शास्त्र में मिलता है उल्लेख
दक्षिण भारत में प्रसिद्ध ‘गौली शास्त्र’ में यह विस्तार से बताया गया है कि छिपकली यदि शरीर के किसी विशेष अंग पर गिरे तो वह जीवन में किस प्रकार के बदलाव का संकेत देती है।
जब छिपकली देती है शुभ संकेत
- सिर पर गिरना: अत्यंत शुभ संकेत, अचानक धन लाभ या विरासत मिलने के योग।
- दाहिने हाथ पर गिरना: कार्यक्षेत्र में उन्नति और आय में वृद्धि की संभावना।
- छाती पर गिरना: आत्मविश्वास में वृद्धि और आर्थिक मजबूती।
- पीठ पर गिरना: पुराने प्रयास सफल होंगे, धन लाभ के संकेत।
- दाहिने कंधे पर गिरना: पदोन्नति और नए अवसर मिल सकते हैं।
जब मिलते हैं अशुभ संकेत
- बाएं हाथ पर गिरना: धन हानि और मानसिक तनाव की आशंका।
- पैरों पर गिरना: यात्रा में बाधाएं और अनावश्यक खर्चे संभव।
- चेहरे पर गिरना: स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आ सकती हैं, सतर्क रहें।
निष्कर्ष
शरीर पर छिपकली का गिरना केवल एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि कई बार यह ज्योतिषीय संकेत भी हो सकता है। यदि यह घटना आपके साथ हो तो संबंधित अंग के अनुसार इसका विश्लेषण करना लाभकारी हो सकता है। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसका कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन परंपराओं और आस्था में इसका विशेष महत्व माना जाता है।