पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तानी सुरक्षाबलों और तालिबानी सैनिकों के बीच खैबर इलाके में हिंसक झड़पों के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। पाकिस्तानी सेना ने तालिबान की नई सीमा चौकी को समझौते का उल्लंघन बताकर उस पर गोलीबारी की, जिसके जवाब में तालिबान ने पाकिस्तान के चेकपोस्ट पर मोर्टार से हमला बोल दिया।
इस बीच पाकिस्तान ने अफगान शरणार्थियों पर सख्ती बढ़ा दी है। अप्रैल महीने में 1,35,000 से अधिक अफगान पाकिस्तान छोड़कर चले गए। मई में 67,000 और जून के पहले दो दिनों में ही 3,000 से ज्यादा अफगान अपने वतन लौट चुके हैं। नवंबर 2023 से पाकिस्तान के निर्वासन अभियान के तहत अब तक 10 लाख से ज्यादा अफगान पाकिस्तान से वापस अफगानिस्तान लौट चुके हैं।
ईरान ने भी अफगान शरणार्थियों को देश छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया है। ईरानी गृह मंत्रालय ने कहा है कि अफगानों को 6 जुलाई तक देश छोड़ना होगा। इससे करीब 40 लाख अफगानों के प्रभावित होने की आशंका है।
पाकिस्तान में अभी भी करीब 30 लाख अफगान नागरिक रह रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, इनमें से 2.18 मिलियन के पास कानूनी दस्तावेज हैं—1.3 मिलियन के पास पीओआर कार्ड और 8.8 लाख के पास एसीसी कार्ड हैं।
अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था और मानवीय हालात पर इसका गहरा असर पड़ रहा है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में शरणार्थियों की वापसी को सम्हालना तालिबान सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।